जिले में बागमती नदी के पानी के ठहराव और जल जमाव से क्षेत्र की दर्जनों जगहों में टूटे हुए तटबंध की मरम्मत नहीं होने से खेतों में पानी का बहाव हुआ है। जिसकी वजह से खरीफ की फसल पूरी तरह से बर्बाद होने लगी है। वहीं इसके बाद अब रबी की फसल पर भी खतरा मंडरा रहा है। गौरतलब है कि दशहरा पर्व के बाद किसान रबी फसल की बुआई शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार किसान की रबी बुआई की कुछ फसलों के उम्मीद पर बाढ़ के पानी ने पानी फेर दिया है।
दोहरी तबाही झेल रहे किसान
जिले के औराई प्रखंड क्षेत्र के जिन गांव में सबसे ज्यादा असर पड़ा है, उसमें बिशनपुर, मुसहरी टोला, राजखंड, रामखेतारी, कोरियाही और धसना समेत कई गांवों में लखनदेई का पानी खेतों में जमा है। जिसके कारण किसान की परेशानी अब भी बनी हुई है। जिसके कारण से किसानों की सामने बड़ी संकट की स्थिति भी खड़ी हो गई है। हालांकि जिला प्रशासन और कृषि विभाग इस दिशा में लगातार समस्या से जल्द निदान दिलाने का दावा कर रही है।
कई दिनों से टूटे है तटबंध
बता दें कि औराई प्रखंड क्षेत्र में स्लुईस गेट के बगल में लखनदेई का पूर्वी तटबंध 50 फीट में टूटा हुआ है और अब तक नहीं बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टूटे तटबंध की वजह से पानी का स्तर कम होने में कम-से-कम दो महीने का समय लगेगा तो ऐसे में गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। इसको लेकर के स्थानीय किसान कौशलेंद्र यादव, अभय कुमार, मनीष शाही, महेश कुमार और मो बाबर अलीमी ने बताया कि तटबंध के टूटने से क्षेत्र में भारी जलजमाव हो गया है और अब अगर शीघ्र तटबंध की मरम्मत नहीं की गई। इसकी वजह से रबी फसल की बुआई संभव नहीं है।
सरकार से की गई मांग
किसानों का कहना है कि जिला प्रशासन और सरकार इसपर कोई ठोस कदम उठाए। ताकि इन क्षेत्रों के किसान ठोस कदम उठाने का काम करे। जलजमाव से किसान को मुक्त करवाए, ताकि किसान अपने फसलों की बुआई समय पर कर सके।