वैशाली जिले में नेपाल स्थित बराज से अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। लालगंज क्षेत्र में गंडक नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर चुका है और वर्तमान में यह डेंजर मार्क से 3 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। जलस्तर में लगातार करीब आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग ने कमर कस ली है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तटीय इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
तटबंधों पर 24 घंटे पहरा, कमजोर हिस्सों पर पैनी नजर
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। विभाग के सहायक अभियंता जनार्दन सिंह और कनीय अभियंता राजेश कुमार तकनीकी टीम और विभागीय कर्मियों के साथ गंडक के तटबंधों पर कैंप कर रहे हैं। इंजीनियरों की टीम संवेदनशील और कमजोर माने जाने वाले स्थलों का लगातार निरीक्षण कर रही है। तटबंधों की मजबूती, पानी के दबाव और बहाव की दिशा पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
बालू की बोरियां और राहत सामग्री तैयार
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए विभाग ने जरूरी सुरक्षा उपकरण, बालू भरी बोरियां और अन्य बाढ़ राहत सामग्री मौके पर तैयार रखी है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव और सुरक्षा कार्य शुरू किया जा सकेगा।
खतरे के निशान से ऊपर पानी, फिर भी स्थिति नियंत्रण में
केंद्रीय जल आयोग के तकनीकी कर्मी प्रभात पांडे ने बताया कि लालगंज में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से 3 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। इसमें करीब 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ोतरी हो रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी बड़े या आसन्न खतरे की आशंका नहीं है। हालांकि, नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है।
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गांवों में मुनादी, नदी किनारे जाने से रोक
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने गंडक के कछार और नदी किनारे बसे गांवों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों को अनावश्यक रूप से घाटों और कछारों की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है। अभिभावकों से बच्चों को नदी के आसपास न जाने देने और पशुपालकों से मवेशियों को नदी की धार या रेतीले किनारों पर न ले जाने की अपील की गई है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तटबंध में कटाव, रिसाव या जलस्तर में कोई असामान्य हलचल दिखाई देने पर तत्काल स्थानीय प्रशासन या जल संसाधन विभाग के कंट्रोल रूम को सूचना दें।