मोतिहारी के रक्सौल शहर के कौड़िहार सैनिक रोड स्थित सिटी हेल्थ केयर क्लीनिक में ऑपरेशन के बाद मरीज के टांके काटने से पहले ही मरीज की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यहां डॉक्टर ने दलालों के मार्फत आए एक मरीज के पेट में गोला होने की बात बताई। फिर सस्ते में उसे निकाल देने का आश्वासन देकर मरीज का ऑपरेशन कर दिया। डॉक्टर की ओर से बताया गया कि 15 दिन बाद टांके काटे जाएंगे, लेकिन 13वें दिन ही मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद हंगामा हुआ। पुलिस भी आई और फर्जी डॉक्टरों के नेटवर्क द्वारा समझौता करने की कोशिश चल रही है। घटना मंगलवार की देर शाम की है।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि इलाज में हुई लापरवाही से मरीज की मौत हुई है। जब ऑपरेशन करा लिया तब पता चला कि यह फर्जी डॉक्टर है। मरीज की मौत के बाद डॉक्टर सहित क्लीनिक के सभी कर्मी फरार हो गए। मौत के बाद मृतक के परिजनों ने हंगामा कराना शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि बिना किसी जांच के ही डॉक्टर ने पेट का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के 13वें दिन मरीज की मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, पूर्वी चंपारण के लौखौरा चैनपुर गांव निवासी नवल किशोर बैठा के बेटे सुमन ने बताया कि उसके पिता को पेट में दर्द रहता था। वह फर्जी डॉक्टरों के दलालों के कम दाम में बढ़िया इलाज होने के झांसे में आ गया। उसके बाद रक्सौल आकर उक्त फर्जी सिटी हेल्थ केयर में पिता को इलाज कराने ले गया। जहां डॉक्टर के तौर पर मुकेश पटेल नाम का व्यक्ति बैठा था। उसने जांच के बाद बताया कि मरीज के पेट में गोला (ट्यूमर) है, इसे ऑपरेशन कर निकालना होगा।
उन्होंने बताया कि उस समय ऑपरेशन की फीस 40 हजार रुपये बताई गई। लेकिन जब मरीज को भर्ती कर दिया गया तो 70 हजार रुपये की मांग की गई। ऑपरेशन होने के बाद धीरे-धीरे डेढ़ लाख रुपये तक ले लिए गए। बेटे ने पिता के इलाज में घरारी स्थित तीन धुर जमीन बेच कर रुपये डॉक्टर को दे दिए। फिर 15वें दिन ऑपरेशन के टांके काटने की बात कही गई। लेकिन 13वें दिन ही उसके पिता की मौत हो गई।
अब बताया जा रहा है कि यह डॉक्टर नहीं है, झोलाछाप डॉक्टर है और दूसरे डॉक्टर के नाम पर क्लीनिक चलाता है। जिस डॉक्टर के नाम पर क्लीनिक चलाता है, वह यहां कभी नहीं आता और उसी के नाम पर यह खुद ही ऑपरेशन तक करता है। उक्त फर्जी डॉक्टर की पहचान रामगढ़वा प्रखंड क्षेत्र के सिंगासिनी वार्ड-11 निवासी मुकेश पटेल के रूप में हुई है।
इधर, रक्सौल थानाध्यक्ष राजीव नंदन सिन्हा ने बताया कि सूचना पर 112 नंबर की गाड़ी को भेजा गया था। वहां मरीज के परिजन उग्र थे। उनको थाना कार्यालय आकर आवेदन देने की बात कही गई है। लेकिन अभी तक आवेदन नहीं मिला है। डॉक्टर और उसका पूरा स्टाफ फरार है। आवेदन मिलने पर जांच कर गिरफ्तार किया जाएगा।