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Bihar: बागमती का जलस्तर बढ़ने से अतरार घाट का चचरी पुल बहा, कटरा में पीपा पुल जलमग्न; गंडक में भी पानी बढ़ा

Wed, 03 Jul 2024 12:54 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Muzaffarpur News: ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 50 सालों से इलाके के लोग चचरी पुल का दंश झेल रहे हैं। ग्रामीण अपने से चचरी पुल बनाते हैं, लेकिन हर वर्ष पुल बह जाता है। बारिश का मौसम भी शुरू हो गया है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब किसी की तबीयत खराब हो जाए।
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बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से चचरी पुल बहा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरपुर में नेपाल और तराई क्षेत्र के साथ बारिश होने से कई नदियों के जलस्तर में तेजी से इजाफा हुआ है। हालांकि बागमती में पानी अभी खतरे के निशान के नीचे है, लेकिन निचले हिस्से में पानी बढ़ने से अब लोग ऊंचे स्थान पर जाने लगे हैं। जहां औराई प्रखंड क्षेत्र के अतरार घाट में चचरी पुल बह गया है, जिसकी वजह से अब लोग आने-जाने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। वहीं, पानी बढ़ने से क्षेत्र की हजारों की आबादी प्रभावित हुई है। इसके कारण लोग अब जान जोखिम में डालकर नांव से नदी पार कर रहे हैं।

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बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से चचरी पुल बहा - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी का जलस्तर तेजी बढ़ने लगा है। वहीं, औराई प्रखंड के अतरार घाट का चचरी पुल बह गया है। इससे आधा दर्जन से अधिक पंचायतों की हजारों की आबादी प्रभावित हुई है। इस इलाके के लोगों को अब मुख्यालय तक जाने के लिए नांव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नांव से नदी पार करने को मजबूर हैं।

औराई और कटरा प्रखंड के महेशवाड़ा, अतरार, अमनौर, सहिलाबल्ली, मधुबन प्रताप नया गांव और हथौड़ी समेत आधा दर्जन पंचायतों के कई गांवों के लोगों को अब प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर होते हुए 40 किमी की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। गौरतलब है बागमती नदी की दक्षिणी उपधारा पर बने हुए चचरी पुल से होकर प्रखंड मुख्यालय जाने में जहां पांच KM की दूरी तय करनी पड़ती थी। वहीं, अब कटौझा या रुन्नीसैदपुर होकर जाने में 20 से 25 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।
 

ग्रामीण नाव से मुख्यालय जाने को मजबूर - फोटो : अमर उजाला
बागमती तटबंध के बीच एक दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए अब नाव ही सहारा है। वहीं, ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 50 सालों से इलाके के लोग चचरी पुल का दंश झेल रहे हैं। ग्रामीण अपने से चचरी पुल बनाते हैं, लेकिन हर वर्ष पुल बह जाता है। बारिश का मौसम भी शुरू हो गया है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब किसी की तबीयत खराब हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो। उसे ले जाने के लिए नाव पर खाट रखते हैं। उस पर गर्भवती महिलाओं को लेकर नदी पार कराते हैं, जान जोखिम में रहती है।

 
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कटरा में पीपा पुल पानी में डूबा - फोटो : अमर उजाला
लोगों ने बताया कि दूसरी ओर पानी बढ़ जाने से लोग अब ऊंचे स्थान पर जाने लगे हैं। वहीं, गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि से साहेबगंज प्रखंड के लोग भी सहमे हुए हैं। नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश की वजह से समस्या बढ़ी है। हालांकि जिला प्रशासन ने इसको लेकर बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रखंड में अंचल अधिकारी और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं और अलर्ट मोड पर काम करने के लिए कहा है।
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