शहर के नयापुरा इलाके में एक मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए जमा मुसलमानों के एक समूह से बात करते हुए जब चुनावी माहौल के बारे में पूछा गया तो खामोशी छा गई। फिर परवेज आलम बोले कि यह इलाका पाटिलपुत्र लोकसभा क्षेत्र में आता है। राम कृपाल यादव जो कल तक राजद में थे, हमारे चहेते नेता रहे हैं। लेकिन अब भाजपा में चले गए, इसलिए मुसलमानों का वोट उन्हें शायद ही मिले।
मोहम्मद इसरासी उर्फ चट्टान ने कहा कि राजद और जदयू दोनों मुस्लिम वोटों पर दावा कर रहे हैं, जबकि हम असमंजस में हैं। पास खड़े नौजवान रज़ा का कहना था कि भाजपा मुसलमानों का वोट तो चाहती है, लेकिन मुस्लिम हितों की एक भी बात वह नहीं करती। उसके एजेंडे में मुसलमान हैं ही नहीं। जबकि लालू और नीतीश के एजेंडे में मुसलमानों के मुद्दे हैं। अब हम इनमें जिसका उम्मीदवार जहां जीत रहा होगा, उसे वहां वोट देंगे।
किधर होगा मुस्लिम मतदाताओं का रुझान
बिहार में लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा अगर दिलचस्प है तो वह मुस्लिम मतदाताओं का रुझान है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने पसमांदा मुस्लिम कार्ड और धुर मोदी विरोध की राजनीति की दम पर मुसलमानों के बड़े हिस्से के समर्थन का भरोसा है तो लालू प्रसाद यादव की कोशिश है कि अपने भाजपा विरोधी ट्रैक रिकार्ड और कांग्रेस से गठबंधन के बल पर ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम वोटों को अपनी ओर खींचा जाए।
वहीं भाजपा की कोशिश भी है कि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण किसी के भी साथ न हो और यह दो या तीन हिस्सों में बंटे।
भाजपा को यह उम्मीद भी है कि अभी तक धर्मनिरपेक्ष छवि वाले रामविलास पासवान के एनडीए में आने से जैसे नीतीश कुमार के प्रभाव में विधानसभा चुनावों और 2009 के लोकसभा चुनावों में जदयू-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवारों को भी मुस्लिम वोट मिले थे, ऐसे ही भाजपा-लोजपा गठबंधन को भी पासवान के प्रभाव वाले इलाकों में कुछ मुस्लिम वोट मिल सकता है।
पासवान से नाराज दिख रहा है मुस्लिम वोटर
जमुई के गांधी मार्केट में लाख की चूडिय़ां बनाते हुए सुलेमान खां ने बताया कि चुनाव के एक दिन पहले बिरादरी तय करती है कि किसे वोट दिया जाए। सबकी रिपोर्ट मंगाई जाती है। हर उम्मीदवार जो भाजपा के खिलाफ लड़ रहा है, उसकी जीत की संभावना पर बातचीत के बाद तय होता है कि किसे वोट देना है।
अब तो मोबाईल का जमाना है, एसएमएस से सबको कह दिया जाता है। सुलेमान की बात की तस्दीक पास बैठे दूसरे कारीगर रियाज़ खां भी करते हैं।
वह कहते हैं कि बिहार का मुसलमान नीतीश और लालू दोनों के साथ है। लेकिन पिछड़े वर्ग के ज्यादातर मुसलमान नीतीश कुमार के साथ हैं। जबकि ऊंची जाति के मुसलमानों का समर्थन राजद को ज्यादा है।
लोजपा नेता रामविलास पासवान भी बिहार के मुसलमानों के चहेते नेता रहे हैं। हाजीपुर में उनकी जीत में मुस्लिम समर्थन भी एक मजबूत ताकत रहा है। लेकिन इस बार हाजीपुर में उन्हें मुसलमानों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।
बिहार में करीब 14 फीसदी मुस्लिम वोट
हालांकि सरकारी कर्मचारी मुश्ताक मोहम्मद और गयासुद्दीन कहते हैं कि पासवान राष्ट्रीय नेता हैं, उन्हें कुछ मुसलमानों का भी समर्थन मिलेगा। लेकिन हाजीपुर की कुंआरी चौक में मिले बुजुर्ग मोहम्मद अंसारी पासवान के एनडीए में जाने से खासे खफा दिखे।
अंसारी कहते हैं कि हमने हर बार उन्हें जमकर समर्थन किया। लेकिन ऐन चुनाव के वक्त पर उन्होंने पाला बदलकर हमारा दिल तोड़ दिया। मोहम्मद जैनुल अंसारी, काजिम अंसारी और पास खड़े दूसरे लोग भी सहमति जताते हैं।
बिहार में करीब 14 फीसदी मुस्लिम वोट है। जो कभी एक मुश्त कांग्रेस की झोली में जाता था, लेकिन 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने जब राममंदिर निर्माण के लिए रथयात्रा पर निकले लालकृष्ण आडवाणी को अयोध्या जाने से पहले बिहार में गिरफ्तार किया, तो मुसलमानों का पूरा झुकाव लालू प्रसाद यादव की तरफ हो गया।
एमवाई समीकरण के बल पर लालू ने किया राज
करीब 15 साल तक यादव और मुसलमानों के एमवाई समीकरण के बल पर लालू परिवार बिहार पर राज करता रहा।
इसे तोडऩे के लिए नीतीश कुमार ने पिछड़े यानी पसमांदा मुसलमानों को आरक्षण का कार्ड चला और फिर नरेंद्र मोदी केसवाल पर भाजपा से नाता तोड़कर मुसलमानों के बीच अपने लिए भी जगह बना ली।
इसलिए कई इलाकों में मुसलमानों के बीच अगर राजद के प्रति लगाव दिखता है तो कई जगह जद(यू) भी उनकी पहली पसंद है। कई सीटों पर उनका रुख नतीजों को इधर से उधर कर देगा।