मां सोनरवा देवी की प्रतिमा का तेज लाल रूप
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मां दुर्गा की प्रतिमा का तेज लाल रूप
परंपरागत रूप से मां दुर्गा की प्रतिमा को तेज लाल रंग में स्थापित किया जाता है। हर साल दुर्गा पूजा के दौरान छठी तिथि को बेल का निमंत्रण और सातवीं तिथि को बेलभरनी का आयोजन होता है। इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूजा के दौरान गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है।
मंदिर के अनुष्ठान और विसर्जन की अनोखी परंपरा
विसर्जन के दिन, मां दुर्गा की डोली को कहार द्वारा उठाया जाता है और पूरे शहर का भ्रमण कराया जाता है। यह डोली माहुरी टोला, खांड पर, चांदनी चौक, लालबाग, चकदीवान और बुधौली होते हुए गिरिहिंडा के खीरी पोखर में विसर्जित की जाती है। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु कहार के रूप में अपनी सेवा देते हैं।
जानकारी के अनुसार, सोनरवा देवी को मनोकामना सिद्ध करने वाली देवी माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत मांगने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए आते हैं। लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है। इसके अलावा मंदिर और पूजा की तैयारियों में भी श्रद्धालु बढ़-चढ़कर योगदान देते हैं, जिससे मंदिर का कायाकल्प होता रहता है।
पूजा समिति की जिम्मेदारी
वर्तमान में मंदिर की देखरेख और आयोजन की जिम्मेदारी पूजा समिति की है। इसमें अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा, सचिव उमेश प्रसाद वर्मा और कई अन्य सदस्य शामिल हैं। हर साल बड़ी धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहता है।