जमुई जिले के किऊल नदी स्थित खैरमा घाट पर मंगलवार देर शाम एक मजदूर 33 हजार वोल्ट का बिजली तार जोड़ने के दौरान नदी की तेज धार में बह गया। यह घटना तब हुई जब मजदूर बिना किसी सेफ्टी किट के नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक बिजली का तार ले जा रहे थे। बहने वाले मजदूर की पहचान खैरा प्रखंड के जीत झींगोई सरसा टोला निवासी विवेक कुमार (32) के रूप में हुई है, जो बिजली विभाग के कार्य में मजदूरी कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम जब यह घटना घटी, स्थानीय लोगों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। गोताखोरों की मदद से नदी में कई घंटों तक खोजबीन की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। घटना की जानकारी मिलते ही जमुई और बरहट के सीओ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि बुधवार की सुबह एनडीआरएफ की टीम को बुलाकर तलाश को और व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा।
वहीं, घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार सुबह जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर पतोना चौक के पास सड़क जाम कर दिया। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने मजदूर के लापता होने के लिए बिजली विभाग और ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के नदी की तेज धारा में काम करने के लिए मजबूर किया गया। स्थानीय लोगों का कहना था कि जब नदी का जलस्तर ऊंचा था और पानी का बहाव तेज था, तब मजदूरों ने काम करने से मना कर दिया था, लेकिन बिजली विभाग और ठेकेदार द्वारा उन पर काम करने का दबाव बनाया गया।
घटना को लेकर परिजनों और अन्य मजदूरों ने संवेदक संजय भालोटिया पर जबरदस्ती कार्य करवाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए खैरा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। परिजनों का कहना है कि संवेदक और बिजली विभाग की लापरवाही के कारण विवेक कुमार की जान खतरे में पड़ी।
स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहे और स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास किया। जमुई सीओ ललिता कुमारी और बरहट सीओ ने घटनास्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द मजदूर की खोज के लिए एनडीआरएफ की टीम बुलाई जाएगी। साथ ही, प्रशासन ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की।
गौरतलब है कि बिजली पोल गिरने और तार जोड़ने का काम नदी के तेज बहाव के बावजूद शुरू किया गया था। ऐसे समय में जब सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे, मजदूरों को बिना किसी सेफ्टी किट के काम करवाया जा रहा था। इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच बिजली विभाग और ठेकेदार के प्रति भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।