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Bihar: सरकारी दावों पोल खुली! 102 एंबुलेंस के इंतजार में बीते पांच घंटे, ई-रिक्शा पर बांधकर ले जाना पड़ा शव

Fri, 31 Jul 2026 11:36 AM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर

सार

मुंगेर में सड़क हादसे में मृत युवक के परिजनों को सरकारी शव वाहन नहीं मिलने के कारण पोस्टमार्टम के बाद शव को 1500 रुपये में किराए पर लिए गए ई-रिक्शा से करीब 30 किलोमीटर दूर गांव ले जाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि पांच घंटे इंतजार और कई बार गुहार लगाने के बावजूद शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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ई-रिक्शा से शव ले जाते परिजन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक गंभीर मामला मुंगेर से सामने आया है। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवक के शव को सरकारी शव वाहन नहीं मिलने पर परिजनों को मजबूरन ई-रिक्शा पर बांधकर करीब 30 किलोमीटर दूर अपने गांव ले जाना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
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जानकारी के अनुसार, बरियारपुर-हवेली खड़गपुर एनएच-333 पर बुधवार देर शाम दो तेज रफ्तार बाइकों की आमने-सामने की टक्कर में धपड़ी गांव निवासी बिट्टू कुमार और सूरज कुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, तीसरे घायल बरियारपुर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी पिंटू कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पिंटू अपने पीछे पत्नी सुलेखा देवी और छह छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।

पांच घंटे तक शव वाहन का इंतजार
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने शव को गांव ले जाने के लिए सरकारी शव वाहन की मांग की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने 102 एंबुलेंस सेवा से भी संपर्क किया। कंट्रोल रूम से जल्द वाहन भेजने का आश्वासन मिला, लेकिन सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक करीब पांच घंटे इंतजार करने के बावजूद शव वाहन नहीं पहुंचा। इस दौरान परिजनों ने कई बार सदर अस्पताल प्रबंधन से भी संपर्क किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि वाहन दूसरे स्थान पर गया है और लौटते ही भेज दिया जाएगा।
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1500 रुपये में किराए पर लिया ई-रिक्शा
आखिरकार परिजनों ने 1500 रुपये में एक निजी ई-रिक्शा किराए पर लिया। चालक पहले शव ले जाने से हिचकिचाया, लेकिन पोस्टमार्टम के दस्तावेज दिखाने और परिजनों की मजबूरी बताने पर तैयार हो गया।
शव को ई-रिक्शा की बीच वाली सीट पर रखकर मोटी रस्सियों से तीन जगह बांधा गया, ताकि रास्ते में वह गिर न जाए। उसी ई-रिक्शा पर शव के साथ आठ लोग गांव के लिए रवाना हुए।

जाम के कारण 30 किलोमीटर का लंबा सफर
रास्ते में जाम मिलने के कारण चालक को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा। करीब 30 किलोमीटर की दूरी तय कर शव को कल्याणपुर गांव पहुंचाया गया। पूरे सफर के दौरान शव ई-रिक्शा में रस्सियों से बंधा रहा। यह दृश्य देखकर राहगीर भी हैरान रह गए।

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परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के भाई संजय दास ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी शव वाहन सेवा पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि पांच घंटे तक अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन से गुहार लगाने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। यदि समय पर शव वाहन उपलब्ध हो जाता, तो परिवार को इस अपमानजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
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सिविल सर्जन बोले-शिकायत मिलने पर होगी जांच
सिविल सर्जन डॉ. राजू ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। यदि पीड़ित परिवार लिखित शिकायत देता है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि किन परिस्थितियों में शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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