अस्पताल के टॉयलेट से मिला नवजात बच्ची का शव
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जमुई के सदर अस्पताल में एक हैरान करने वाले मामले ने बुधवार को अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर किया है। जहां सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के सामने टॉयलेट के गटर में एक नवजात बच्ची का शव मिला। उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्वीपर को शव को निकालने के लिए कहा। लेकिन शव को निकालने में घंटों का समय लग गया। वहीं, शव को निकालने पर बच्ची का सिर धड़ से अलग हो गया। इसके बाद स्वीपर ने शव को कूड़ेदान में फेंक दिया। हालांकि नवजात बच्ची किसकी थी यह पता नहीं चल सका। इसको लेकर अस्पताल प्रबंधन ने जांच करने की बात कही है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए एक कमिटी भी बनाई है।
वहीं, अस्पताल इलाज कराने आए एक व्यक्ति ने बताया कि वह इमरजेंसी वार्ड के बगल स्थित टॉयलेट गया हुआ था। जहां एक नवजात बच्चा टॉयलेट के गटर में फंसा हुआ था। इसके बाद इसकी सूचना वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई। सूचना पाकर वहां स्वास्थ्य कर्मियों और अस्पताल इलाज करने आए लोगों की भीड़ जमा हो गई। उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने स्वीपर को शव को निकालने के लिए कहा। लेकिन शव को निकालने में तीन घंटे से अधिक समय लग गया। जब शव को निकाला गया तो बच्ची का सिर धड़ से अलग हो गया। इसके बाद लोहे की खंती से टॉयलेट को तोड़कर बच्ची के सिर को निकालकर धड़ के साथ कूड़ेदान में फेंक दिया गया।
वहीं, मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर किया है। अस्पताल प्रबंधन को अपनी लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
जबकि अस्पताल प्रबंधक रमेश पांडेय ने बताया कि इस घटना की जानकारी टाउन थाना पुलिस को दी है। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर शव के पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में जुट गई है। रमेश पांडेय ने कहा कि यह मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। साथ ही रात में जितनी भी डिलीवरी हुई हैं, सभी की जांच की जा रही है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।