शेखपुरा जिले को गुरुवार की शाम अचानक बदले मौसम ने बुरी तरह झकझोर दिया। तेज आंधी और बारिश के साथ गिरी बिजली ने आठ लोगों की जान ले ली और जिलेभर में व्यापक तबाही मचा दी। बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, सड़कों पर पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, तो वहीं खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं।
शाम करीब चार बजे तेज हवा और मूसलाधार बारिश के साथ मौसम ने ऐसा रौद्र रूप लिया कि पूरा जिला दहशत में आ गया। आंधी इतनी तेज थी कि कई जगहों पर टीन-शेड, छप्पर और दुकानों की छतें उड़ गईं। कई घरों पर पेड़ गिर गए, दीवारें ढह गईं, तो कहीं नल-जल योजना की पानी टंकी धराशायी हो गई। शहर ही नहीं, गांवों में भी भारी नुकसान हुआ।
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बिजली की चपेट में आकर आठ लोगों की मौत
अचानक गिरी आकाशीय बिजली ने आठ परिवारों को मातम में बदल दिया। मृतकों में मंदना गांव की 50 वर्षीय सीता देवी, पूरनकामा गांव की 65 वर्षीय सातो देवी, कोसरा गांव की 69 वर्षीय करिशो देवी, अरियरी थाना क्षेत्र के कृष्णा प्रसाद, डीहा पंचायत के 58 वर्षीय रामाश्रय चौहान, जमालपुर मोहल्ला के 70 वर्षीय अरुण कुमार, छेमा गांव के 60 वर्षीय मनोज कुमार सिंह और जमुई जिले के मंदरा गांव की सीता देवी शामिल हैं। सभी शवों को सदर अस्पताल लाया गया था, जहां पोस्टमार्टम के दौरान अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने सभी की मौत की पुष्टि की।
बिजली गुल, रास्ते बंद, जनजीवन अस्त-व्यस्त
तेज हवा और बारिश के कारण जिलेभर में बिजली के खंभे और तार टूट गए। कई इलाकों में पेड़ गिरने से सड़कें जाम हो गईं। रतोइया नदी के पास, शेखपुरा-लखीसराय मुख्य मार्ग और पुरैना सहित कई जगहों पर बड़े पेड़ गिरने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
शेखोपुरसराय के चरुआमा में नलजल योजना की पानी टंकी गिरने से स्थानीय लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। सिरारी में करकट की दुकानों के उजड़ने से दुकानदारों को बड़ा नुकसान हुआ है।
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चैत महीने की इस बेमौसम बारिश और बवंडर ने खेतों में खड़ी फसलों को तबाह कर दिया। गेहूं, प्याज, दलहन और तेलहन की फसलें या तो गिर गईं या कीचड़ में लथपथ होकर बर्बाद हो गईं। किसान खेतों में दौड़-भाग कर जितनी फसल बच सकती थी, उसे समेटने की कोशिश करते दिखे।
विधायक विजय सम्राट ने की मुआवजे की मांग
घटना की गंभीरता को देखते हुए शेखपुरा विधायक विजय सम्राट ने बिहार सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ बारिश नहीं थी, बल्कि किसान की मेहनत, उसकी उम्मीद और उसकी पूरी फसल को बहा ले गई। तेज बारिश, ओलावृष्टि और बवंडर ने किसानों की सारी तैयारी को मिट्टी में मिला दिया है। उन्होंने इस प्राकृतिक आपदा को सरकार से आपदा घोषित करने की अपील करते हुए कहा कि यह संकट किसानों के जीवन को गहरे तक प्रभावित करेगा, जिसकी भरपाई बिना सरकारी मदद के संभव नहीं है।
नुकसान का आकलन जारी
घटना के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। बिजली विभाग ने वैकल्पिक आपूर्ति की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं, जबकि सड़क जाम हटाने के लिए जेसीबी से पेड़ हटाने का काम चल रहा है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।