बिहार में गया के बांकेबाजार थाना क्षेत्र के हुसैनगंज गांव से सटे जंगल में माओवादियों द्वारा जनअदालत लगाई। इसमें विभिन्न गांवों से अगवाकर लाए गए पांच लोगों को पेश किया गया। इनमें से दो के मुखबिरी की बात कबूलने पर उन्हें गोली से उड़ा दिया।
दो अन्य को शारीरिक व आर्थिक दंड दिया, जबकि एक को साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया।
माओवादियों ने जनअदालत में डुमरी गांव के लक्ष्मण परहिया, सत्येन्द्र प्रसाद व रामप्रवेश प्रसाद, बाराटांड के सुरेन्द्र यादव और मोरैनिया गांव के प्रवेश भोक्ता को अगवाकर जनअदालत में पेश किया।
जनअदालत की कार्रवाई पूरी रात चली। लक्ष्मण परहिया एवं रामप्रवेश प्रसाद पर आरोप था कि बिहार विधान सभाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के इशारे पर दोनों माओवादिओं की गतिविधियों और छुपाकर रखे गए विस्फोटकों की सूचना पुलिस को देते थे।
इस सूचना पर पुलिस ने छापेमारी कर माओवादिओं को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया। दोनों पर एसपीएम सुप्रीमो चंदन से साठगांठ कर धनेता के विरेन्द्र कुमार की हत्या कराने का भी आरोप था।
अदालत में दोनों ने जब अपना गुनाह कबूला तो उन्हें सजाए-मौत का फरमान सुनाया गया। इसके बाद दोनों को गोली मार दी गई।
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वहीं, प्रवेश भोक्ता को शारीरिक और सुरेन्द्र यादव को शारीरिक व आर्थिक दंड दिया गया। सत्येन्द्र प्रसाद को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
जनअदालत में माओवादिओं ने उपस्थित लोगों को आगाह किया कि जो लोग विधान सभाध्यक्ष की चापलुसी कर संगठन को हानि पहुंचाने का काम करेंगे, उन्हें लक्ष्मण परहिया व राम प्रवेश प्रसाद की तरह ही दंडित किया जाएगा।
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