बिहार में एनडीए के सबसे बड़े घटक लोक जनशक्ति पार्टी के युवा नेता चिराग पासवान इन दिनों चुनाव प्रचार में इस कदर व्यस्त हैं कि उन्हें जरा भी फुर्सत नहीं है। हर सुबह प्रचार के लिए निकलना और सूरज ढलने पर लौटना और अगले दिन की तैयारी में व्यस्त हो जाना। पिता रामविलास पासवान भी उनसे पूरी मदद लेते हैं। इस चुनावी भागदौड़ में चिराग पासवान से अमर उजाला के लिए विनोद अग्निहोत्री ने की बातचीत।
लोकसभा चुनाव आप खुद लड़े थे। अब आप चुनाव लड़ा रहे हैं। दोनों के माहौल में क्या फर्क है?
लोकसभा में खुद उम्मीदवार था। मेरे ऊपर काफी निजी जिम्मेदारी थी। अब मैं प्रचार कर रहा हूं तो पार्टी की जिम्मदारी तो है पर निजी जिम्मेदारी कम है। जहां तक माहौल की बात है तो मुझे लगता है कि लोकसभा से ज्यादा बेहतर माहौल इस बार है। लोकसभा जिसे मोदी लहर कहा गया और कुछ लोगों ने प्रचार किया कि वह लहर अब खत्म हो गई, तो मुझे लगता है कि मोदी लहर और तेज हुई है। क्योंकि पिछले डेढ़ साल में जितना काम मोदी सरकार ने किया। जो काम यूपीए सरकार दस सला में नहीं कर पाई, उसे हमारे प्रधानमंत्री जी ने एक बार में सवा लाख करोड़ रुपए का विशेष पैकेज बिहार को देकर अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया। उसका असर गांव गांव है। मैं अनेक जिलों और प्रखंड स्तर पर जा रहा हूं और लोगों से बात कर रहा हूं तो मुझे यही सुनने को मिल रहा है कि अब मोदी लहर और तेज हो गई है और एनडीए को दो तिहाई बहुमत मिलेगा।
आपके हिसाब से चुनाव का मुख्य मुद्दा क्या है? चुनाव जातिगत आधार पर हो रहा है या हिंदुत्व के आधार पर या फिर विकास पर।
लालू जी इस चुनाव को बार बार जातिगत बनाने की कोशिश जरूर कर रहे हैं। जिस तरह भाषण दे रहे हैं। आरक्षण को प्रमुख मुद्दा बनाया। स्वाभिमान रैली में सिर्फ यादवों की ही बात की। फिर गो मांस की बात करके सेल्फ गोल कर लिया। लेकिन एनडीए का मुद्दा सिर्फ विकास है। लोकसभा चुनाव भी हमने विकास के मुद्दे पर ही लड़ा और जीता। बिहार को आज विकास की बेहद जरूरत है। बाकी प्रदेश कितना आगे बढ़ गए। दिल्ली मुंबई में मेट्रो बुलेट ट्रेन स्मार्ट सिटी और तमाम आधुनिक चीजों की चर्चा हो रही है। वहीं बिहार में अभी भी घर के सामने की सड़क, नाली की सफाई, अस्पताल में दवाई, बिजली, चापाकल की चिंता है। जिस प्रदेश में आजादी के 68 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो वहां विकास के अलावा कोई मुद्दा हो नहीं सकता।
लेकिन जिस तरह महागठबंधन ने नीतीश कुमार को नेता घोषित किया, एनडीए नहीं कर सका। क्या यह उसका कमजोर पक्ष नहीं है? शुरु में रामविलास पासवान जी का नाम भी लिया गया था। आपकी क्या राय है?
बिल्कुल भी कमजोर पक्ष नहीं है। जहां तक हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का सवाल है तो उन्होंने पहले ही यह घोषित कर दिया था कि कभी भी मुख्यमंत्री बनना उनकी प्राथमिकता नहीं रही और न ही उनके दल का कोई इस पद पर दावा है। भाजपा गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी हैं और सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ रही है। मुख्यमंत्री उसी का होगा। फिर संसदीय लोकतंत्र में निर्वाचित विधायक ही मुख्यमंत्री चुनते हैं तो जब सारे विधायक जीतकर आएंगे तो अपना नेता चुनेंगे। इससे सामूहिक नेतृत्व को भी बल मिलेगा। वैसे भी एनडीए ने जिस राज्य में मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया वहां उसे कामयाबी मिली।
एनडीए में सीटों के बंटवारे में लोक जनशक्ति पार्टी के साथ पूरा न्याय नहीं हुआ?
यह हमारी चिंता थी। हमारे कार्यकर्ताओं में भी असंतोष था। मीडिया में भी हमारी चिंता और असंतोष की खबरें आई थीं। मैने भी अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस की थी और कहा कि हम नाराज नहीं हैं लेकिन आहत जरूर हैं। क्योंकि बंद कमरे में हम लोगों के साथ जो बातचीत हुई थी,बंटवारा उस हिसाब से नहीं हुआ। हमने इस बात को भाजपा के शीर्ष नेताओं के सामने रखा। उसी रात अमित शाह जी ने मुझे अपने निवास पर बुलाकर मुझसे करीब डेढ़ दो घंटे तक बातचीत की। अमित शाह जी मुझसे उम्र तजुर्बे और रुतबे में काफी बड़े और एनडीए के बेहद सम्मानित नेता हैं। उनसे जिरह और जिद करना मुझे शोभा नहीं देता था। मैने उनकी बात को मान लिया। मामला खत्म हो गया।
आप फिल्मों और राजनीति में कहां ज्यादा सुविधाजनक महसूस करते हैं?
बेशक राजनीति में। मछली के बच्चे को कभी तैरना नहीं सिखाया जाता है। मैं बचपन से ही राजनीतिक वातावरण में पला बढ़ा हूं। फिल्मों में काम करने का मुझे शौक था। इसलिए मुंबई भी गया। वहां संघर्ष किया। लेकिन वहां मेकअप करना उतारना यह सब बेहद अखरता था। मुझे अहसास हो गया कि मेरा फैसला गलत हो गया। मैं इस क्षेत्र के लिए नहीं हूं। राजनीति मेरे लिए सहज है। इससे अलग मेरा कोई क्षेत्र नहीं है। फिर पिता का मार्गदर्शन मेरे पास है। इसलिए अगर राजनीति छोड़कर किसी और क्षेत्र में जाऊंगा तो मैं सहज नहीं रह पाऊंगा। बड़े पर्दे पर खुद को देखने का शौक पूरा कर लिया।
बिहार में युवा नेताओं की नई पीढ़ी आ रही है। क्या चिराग पासवान के रूप में बिहार को एक सर्वाधिक लोकप्रिय युवा नेता मिलने जा रहा है?
अब नया युवा नेता मिलने जा रहा या नहीं ये तो मैं नहीं कह सकता। लेकिन मेरी एक ईमानदार कोशिश जरूर है कि बिहार के बाहर जो एक छवि बिहार और बिहारियों की बन गई है, उन्हें जिस तरह अपमानित किया जाता है। गालियां दी जाती हैं मारपीट की जाती है। खुद मैं उस दौर से गुजरा हूं। उसे बदलना चाहिए। मुझे बिहार का खोया सम्मान वापस लाना है। इसलिए मैने तय किया कि मैं बिहार आकर अपने प्रदेश का सम्मान लौटाऊंगा। मैं चाहता हूं कि लोग नौकरी करने बिहार आएं न कि बिहार के लोग दिल्ली मुंबई जाएं। बिहार में सब कुछ है। जरूरत सिर्फ एक सोच और काम करने की है जो पिछले 68 सालों में नहीं हुआ। इस दिशा में अपने पिता से सीख रहा हूं। कोशिश है कि युवाओं के बीच अपनी पकड़ बना सकूं। एक टीवी चैनल के सर्वे में सबसे लोकप्रिय युवा नेता के रूप में चिराग पासवान का नाम जब लिया गया तो मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा।
लोकजनशक्ति पार्टी 42 सीटों पर लड़ रही है। कितनी जीतने की उम्मीद है?
चुनाव तो हर सीट जीतने के लिए लड़ा जाता है। लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा स्ट्राइक रेट रहेगा। लोकसभा चुनाव में भी मैने कहा था कि बिहार में एनडीए तीस से ज्यादा सीटें जीतेगा और हम 31 जीते। लोजपा के लिए मैने कहा था कि हम कम से कम पांच सीटें जरूर जीतेंगे और सात भी जीत सकते हैं। हम छह जीते, सातवीं सीट बहुत कम वोटों से हारे। मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ। इस बार भी मुझे लगता है कि हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा होगा और कम से कम 32 सीटें जीतेंगे।
और एनडीए कितनी सीटें जीतेगा?
एनडीए का लक्ष्य 185 सीटें जीतने का है। मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर हम उसे पा लें या उससे भी आगे निकल जाएं। मैं जो माहौल देख रहा हूं, इसलिए यह विश्वास है।