बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान हमेशा एक ध्रुव रहे हैं। सियासी संतुलन को बदलने की उनकी ताकत कभी उन्हें एनडीए के साथ रखती है तो कभी यूपीए के साथ और कभी फिर एनडीए के साथ। लोकसभा चुनाव से पहले अप्रत्याशित रूप से नरेंद्र मोदी का दामन पकड़कर पासवान ने सबको चौंका दिया था। दिनरात चुनाव प्रचार में जुटे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान से अमर उजाला के लिए विनोद अग्निहोत्री ने की बातचीत।
पासवान जी आप लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में आए थे क्यों तब देश में मोदी लहर चल रही थी। क्या बिहार में अभी भी वही माहौल है या कुछ बदला है?
बिहार में भाजपा और एनडीए के पक्ष में उससे भी ज्यादा अच्छा माहौल है। लोकसभा चुनावों में जनता को नरेंद्र मोदी से उम्मीद थी। लेकिन अब पिछले डेढ़ साल की उनकी सरकार में लोगों ने देखा कि मोदी जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। उनकी विश्वसनीयत बढ़ी है। बिहार की जनता का भरोसा एनडीए पर मजबूत हुआ है। लोकसभा चुनावों में मोदी की आंधी थी, लेकिन अब मोदी का तूफान है और उसके सामने आने वाला कोई पेड़ नहीं बचेगा।
चुनावों में मुद्दा क्या है? जातीय समीकरण, हिंदुत्व या विकास?
बिहार चुनावों में सिर्फ और सिर्फ एक ही मुद्दा है विकास। लोगों ने इस मुद्दे को पकड़ लिया है। लोग चाहते हैं कि बिहार भी देश के अन्य राज्यों की तरह विकास के पथ पर आगे बढ़े।
लेकिन जिस तरह गो हत्या और गोमांस का मुद्दा भाजपा और संघ के सहयोगी संगठन उठा रहे हैं, उसमें विकास की चर्चा तो पीछे छूटती जा रही है?
गो मांस के मुद्दे को न हिंदू पसंद कर रहा है और न मुसलमान। धर्म के नाम पर लोगों को कब तक बांटेंगे। किसी को किसी पशु से प्यार होता है किसी को किसी और से। उसे धर्म से क्यों जोड़ते हैं। लालू यादव जिस वर्ग को यदुवंशी कहकर वोट मांगते हैं, वह भी नाराज है। बाबा रामदेव तक का बयान आ गया। लालू यादव परेशान और फ्रस्टेटेड हो गए हैं। कह रहे हैं कि जुबान पर शैतान बैठ गया था। अब कल अगर उनकी सरकार बन जाए और फिर शैतान आ जाए तो क्या होगा बताइए। वो जितना बोल रहे हैं, उनका वोट कट रहा है।
लेकिन आप लोग भी तो गैर मुद्दों को मुद्दा बना रहे हैं। मसलन उनके बेटे की शिक्षा या दोनों बेटों की उम्र जैसे गैर जरूरी सवाल को क्यों उठा रहे हैं?
यह सवाल जरूरी है। लालू यादव मुख्यमंत्री होकर भी जब अपने बेटे को नवीं से आगे नहीं पढ़ा सके तो बिहार को क्या शिक्षित करेंगे। मैं भी बिहार के एक दलित और गरीब परिवार से निकला। लेकिन मैने अपने बेटे को पढ़ाया कि नहीं। इसी तरह भला कौन पिता होगा जिसे अपने बेटों को उम्र न मालूम हो। लालू जी को वो भी नहीं पता। बड़ा बेटा छोटा हो गया और छोटा बड़ा। सवाल है कि आपकी प्राथमिकता का है।
जिस तरह एनडीए में सीटों का बंटवारा हुआ उससे संदेश गया कि लोजपा को उचित हिस्सा नहीं मिला। आपने और चिराग ने ऐसे संकेत भी दिए। क्या वह दरार अब भरी कि नहीं?
यह सब चुनावों मे चलता है। हर दल और परिवार में यह प्रवृत्ति होती है कि ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मिले। कार्यकर्ता को भी संदेश देना होता है कि हमारे नेता खूब लड़े। यह भी जरूरी होता है। फिर पहले एनडीए में हम और उपेंद्र कुशवाहा जी थे। लेकिन अब मांझी जी भी आ गए तो कुछ तो हिस्सेदारी बंटनी ही थी। अब कोई दरार नहीं है। पूरा एनडीए एकजुट है।
लेकिन जीतन राम मांझी ने आपको लेकर जिस तरह तल्ख बयान दिया। उससे दोनों के समर्थकों में दरार नहीं पड़ी?
नहीं ऐसा कुछ नहीं है। मांझी जी ने तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा। जैसा कि लालू यादव और नीतीश कुमार ने एक दूसरे के बारे में कहा था। जिस भाषा का प्रयोग लालू यादव आज अमित शाह और नरेंद्र मोदी के लिए कर रहे हैं ऐसी भाषा वह तब नीतीश कुमार के लिए प्रयोग करत थे जब नीतीश भाजपा के साथ थे। मेरा और मांझी जी का तो ऐसा कुछ भी नहीं रहा।
एनडीए ने अगर मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया होता तो क्या शायद और बेहतर होता?
बिल्कुल नहीं। मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित न करने से एनडीए में एक सामूहिक नेतृत्व की भावना मजबूत हुई है और सब नेता मिलजुलकर मेहनत कर रहे हैं। भाजपा की यह रणनीति महाराष्ट्र, झारखंड,हरियाणा और जम्मू कश्मीर में सफल रही है।
मुख्यमंत्री पद केलिए आपका नाम भी लिया जाता है। अगर ऐसी कोई पेशकश होती है तो क्या आप स्वीकार करेंगे?
नहीं । मैने शुरु में ही साफ कह दिया था कि मैं मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हूं।
मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान का चुनाव पर क्या असर है?
कोई असर नहीं पड़ेगा। कोई भी सरकार आरक्षण को खत्म नहीं कर सकती है। आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है। हमारी जानकारी है कि उन्होंने आरक्षण के संबंध में नहीं कहा था। उन्होंने गुजरात में जो हार्दिक पटेल का आरक्षण आंदोलन चल रहा है,उसके संबंध में कहा था। किसी जाति को आरक्षण में शामिल किया जाए या नहीं किया जाए इस पर बहस हो सकती है। लेकिन आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता।
एनडीए को कुल कितनी सीटें मिलेंगी?
मुझे लगता है कि लोकसभा में जितना वोट एनडीए को मिला था, उससे ज्यादा वोट और सीटें इस बार मिलेंगी। लोकसभा चुनाव में जिन सीटों पर एनडीए पिछड़ गया था, इस बार वहां भी हम जीतेंगे। लालू यादव और नीतीश कुमार जितना बोल रहे हैं उनकेवोट और सीटें उतनी ही कम हो रही हैं। वह कम बोलें तो अच्छा है।
बिहार में युवा नेताओं की एक नई पीढ़ी आ रही है। क्या चिराग पासवान उनमें सर्वाधिक लोकप्रिय नेता के रूप में उभर सकते हैं?
एक सर्वेक्षण हुआ था, उसमें चिराग पासवान को सर्वाधिक लोकप्रिय युवा नेता बताया गया था। हालाकि किसी ने नाम नहीं लिया था। चिराग का कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं उसका पिता हूं। बिहार के किसी भी इलाके जाति मजहब में पूछिए चिराग की लोकप्रियता सबसे ऊपर है। उसका कोई मुकाबला किसी से नहीं है।
अगर एनडीए की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री चुनने में आप लोगों की भी भूमिका होगी या सब भाजपा ही तय करेगी?
पहले हमारी सरकार तो बनने दीजिए। हमारी प्राथमिकता पहले बारात सजाने की है। दूल्हे का फैसला बाद में कर लेंगे।
भाजपा के होडिंग्स में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तस्वीरों के साथ एनडीए नेताओं की तस्वीरें क्यों नहीं हैं?
नहीं ऐसा नहीं है। हर दल प्रचार में अपने नेताओं को प्रमुखता देता है। नीतीश कुमार के होर्डिंग्स में लालू यादव और सोनिया गांधी के चित्र कहां हैं। हमारे होडिंग्स में भी मेरा और चिराग का फोटो है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।