CM नीतीश के काफिले पर पुष्प वर्षा करते समर्थक।
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सभी कह रहे- बैठकर तय करेंगे नेता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार शाम करीब 52 घंटे की दिल्ली यात्रा से लौटने के बाद खुद कहा था कि शुरुआती बातचीत अच्छी हुई है, आगे की बातचीत सभी दलों के नेता एकजुट होकर करेंगे। दिल्ली में मुख्यमंत्री जिन नेताओं से मिले, उन सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष के किसी एक नाम पर अपनी मुहर नहीं लगाई। मुहर तो दूर की बात, इसपर चर्चा से भी इनकार किया। सांसदी जाने से पहले कांग्रेस राहुल गांधी के अलावा किसी नाम पर तैयार नहीं थी, अब वह बातचीत के लिए आगे भी आई है और नीतीश इसलिए दिल्ली गए भी। वामदलों के बीच भी नाम को लेकर कोई चर्चा नहीं है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या किसी और नाम पर राजी होंगी, इसका कोई अनुमान भी नहीं लगा पा रहा है।
एकजुटता के पीछे वर्चस्व की लड़ाई भी जगजाहिर
भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रहे दलों में नेतृत्व को लेकर अंदर ही अंदर वर्चस्व की लड़ाई है। उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से बार-बार बाहर बताकर विपक्षी दलों की एकजुटता का प्रयास तेज किया है। लेकिन, अब दिल्ली से उनके लौटते ही जदयू नेताओं ने जो रुख अपनाया है, उसे अगर कांग्रेस, तृणमूल या वामपंथी दलों ने गंभीरता से ले लिया तो सारी मेहनत पर पानी भी फिर सकता है।