किशनगंज के ठाकुरगंज में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बीच एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। कुल 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से संबंधित प्रतिवेदन में 1.68 एकड़ सरकारी भूमि का न्यूनतम मूल्यांकन दर (एमवीआर) दर्ज नहीं किया गया था। इस बात का खुलासा होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया है। जांच के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन का मूल्यांकन प्रतिवेदन में क्यों शामिल नहीं हो सका। फिलहाल इस मामले में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
संशोधित प्रतिवेदन तैयार होगा
प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के निर्माण हेतु कुल 189.68 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जानी है। इस कुल रकबे में 188 एकड़ रैयती भूमि और 1.68 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है। किशनगंज के अपर समाहर्ता ने 23 सितंबर को पत्र के माध्यम से पूरी जमीन का ब्योरा दिया था। दस्तावेज की समीक्षा के समय सरकारी भूमि का न्यूनतम मूल्यांकन दर दर्ज न होने की चूक उजागर हुई। अंचल अधिकारी ने राजस्व कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगते हुए तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी है। पड़ताल के दौरान जमीन के रकबे, उसकी प्रकृति और निर्धारित न्यूनतम मूल्यांकन दर से जुड़े राजस्व अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण होगा। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक सुधार करके संशोधित प्रतिवेदन तैयार होगा और इसे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा।
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अक्तूबर 2025 से जारी है प्रक्रिया
ठाकुरगंज में सैन्य स्टेशन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया अक्तूबर 2025 से चल रही है। मुख्यालय 111 एरिया ने 1 अक्तूबर 2025 को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया था। तत्पश्चात 7 नवंबर 2025 को रक्षा संपदा अधिकारी ने 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से जुड़ा पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से परियोजना की सैद्धांतिक स्वीकृति का उल्लेख किया गया था। इसके उपरांत जिलाधिकारी किशनगंज और अंचल अधिकारी के स्तर पर लगातार प्रशासनिक पत्राचार हुए तथा अधिग्रहण के प्रतिवेदन तैयार किए गए।
मूल्यांकन दुरुस्त करने पर ध्यान
सरकारी जमीन की न्यूनतम मूल्यांकन दर का विवरण छूट जाने के उपरांत अब प्रशासनिक स्तर पर संबंधित दस्तावेज को दुरुस्त करने का काम आरंभ कर दिया गया है। वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान मूल्यांकन से जुड़ी कमियों को दूर करने और अभिलेखों को सही करने पर केंद्रित है। राजस्व कर्मचारी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि मूल प्रतिवेदन में यह महत्वपूर्ण जानकारी किस कारण से छूट गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर संशोधित प्रतिवेदन बनने के बाद ही अधिग्रहण की आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।