बिहार के नालंदा जिले के राजगीर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले चंदोरा गांव के बूथ नंबर 299 के निवासियों ने चुनाव का बहिष्कार किया है। लोगों का कहना है कि सड़कें नहीं तो वोट नहीं। केवल इतना ही नहीं उन्होंने ईवीएम और खंड विकास अधिकारी की कार पर भी हमला किया। यहां लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए मतदान हो रहे हैं।
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बिहार के अलावा वाराणसी के आराजीलाइन विकासखंड के ग्रामसभा बैरवन के लोगों ने शुक्रवार को रेलवे लाइन अंडरपास व ट्रांसपोर्ट नगर के किसानों के जमीन पर नाम चढ़ाने को लेकर मतदान बहिष्कार का एलान किया। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जाने के लिए रास्ता नहीं है। रेलवे लाइन डबल ट्रैक होने से महिलाओं व बच्चों को पार करने में काफी परेशानी हो रही है। बार-बार आश्वासन दिया जाता है लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता है। जब तक अंडरपास नहीं बनाया जाएगा तब तक हम लोग मतदान नहीं करेंगे।
इससे पहले 15 मई को हिमाचल प्रदेश के सोलन के सुई बोही गांव में ग्रामीण एक तख्ती लेकर घूम रहे थे जिसपर लिखा था कृपया वोट मांगकर शर्मिंदा न करें। बैठक में ग्रामवासियों ने निर्णय लिया कि जब तक ग्राम पंचायत बैरल के गांव सुई बोही की मांग पूरी नहीं की जाती तब तक ग्रामवासी एक भी वोट नहीं देंगे। सभी ग्रामवासियों को आजादी के 70 साल बाद भी सरकारों ने चूना लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने चुनाव के दौरान आश्वासन दिया था कि उन्हें वोट दो और वे सड़क बना देंगे। लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ।