बिहार के मुजफ्फरपुर में लगातार बच्चों को मौत हो रही हैं, लोग परेशान हैं, डॉक्टरों के पास कोई जवाब नहीं है और प्रशासन बेबस नज़र आ रहा है। कोई जवाब नहीं दे पा रहा कि आखिर ये कौन सी बीमारी है जो इतने बच्चों की मौत का कारण बन रही है।
इस बीच ये कयास लगाए जाने शुरू हो गए कि लीची और बच्चों की मौत के बीच कोई कनेक्शन है लेकिन अब मुजफ्फरपुर के कार्यवाहक डीएम कंवल तनुज और एनआरसीएल के डारेक्टर विशाल नाथ ने इस बात से इंकार कर दिया है।
अभी तक 52 बच्चों की मौत इस जानलेवा बीमारी के कारण हो चुकी है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन समेत तमाम नेता और प्रशासनिक अधिकारी अपनी तरफ से हर संभव कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन सब बेकार साबित हो रही हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि नेश्नल सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल के वैज्ञानिकों के मुताबिक एईएस औऱ लीची वायरस का आपस में कोई संबंध नहीं है। एईएस एक मौसमी बीमारी लगता है, इत्तेफाक है कि ये बीमारी उसी मौसम में पांव पसारती है जब लीची की पैदावार होती है। अभी तक ये साबित नहीं हुआ है कि इस बीमारी और लीची का कोई संबंध है।
अंग्रेजी अखबार TOI के मुताबिक दरअसल इन दिनों एक अफवाह फैली हुई है वो ये कि लीची खाने से बच्चों की मौतें हो रही हैं। बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में भी सोशल मीडिया के माध्यम से ये खबर फैल रही है।
बैंगलोर में 12 टन मुजफ्फरपुर लीची फेंक दी गई और मुंबई के व्यापारी इसे खरीदने को तैयार नहीं हैं। अफवाहों के बाद इस फल को खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है।