बिहार के आरा सिविल कोर्ट ने बुधवार को करीब 30 साल पहले के चर्चित इचरी नरसंहार मामले में नौ लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने सभी दोषियों को 25-25 हजार रुपये के आर्थिक दंड की भी सजा सुनाई है। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है। जबकि इस मामले में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जगदीशपुर के पूर्व विधायक भगवान सिंह कुशवाहा को कोर्ट ने संदेह के लाभ के आधार पर बाइज्जत बरी कर दिया है। यह कांड को भोजपुर जिले के आयर थाना क्षेत्र के आटा पुर गांव स्थित नागा बाबा के मठिया के पास अंजाम दिया गया था।
जानकारी के मुताबिक, इचरी नरसंहार मामले में सजा का फैसला आरा सिविल कोर्ट के एडीजे-3 सतेंद्र सिंह की अदालत ने दिया है। वहीं, आरोपियों को सजा देने के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवारों ने न्यायालय के प्रति संतोष जाहिर करते हुए आभार व्यक्त किया है। इचरी नरसंहार मामले में बरी हुए पूर्व मंत्री और जगदीशपुर के पूर्व विधायक भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि अदालत पर मुझे पूरा भरोसा था। आज कोर्ट के द्वारा जो फैसला सुनाया गया है उसका मैं तहे दिल से का स्वागत करता हूं। कोर्ट के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद सभी नौ दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
सिविल कोर्ट के सहायक लोक अभियोजक और अधिवक्ता प्रशांत रंजन ने बताया कि आयर थाना क्षेत्र के आटा पुर गांव के पास 29 मार्च 1993 की देर शाम एक समाज के लोग जो भाजपा समर्थक भी थे, वे कहीं से बैठक कर ट्रैक्टर से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान हथियारबंद बदमाशों ने उनपर जानलेवा हमला करते हुए गोलियां बरसा दी थीं। उस घटना में राजपूत सामाज के करीब पांच लोगों की गोली लगने से मौत हो गई थी। जबकि नौ लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। घायलों में एक साह परिवार के भी सदस्य थे। इस घटना के बाद पुलिस ने सामूहिक हत्याकांड में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जगदीशपुर विधानसभा के पूर्व विधायक भगवान सिंह समेत कुल 24 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जहां लंबी कानूनी कार्रवाई और साक्ष्य-गवाह के आधार पर कोर्ट में दोनों पक्षों के द्वारा अपनी-अपनी दलील दी गई थी।