क्या राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी बिहार में पिछड़ों के मसीहा रहे कर्पूरी ठाकुर की तर्ज पर अपनी जन्मभूमि से दूर सियासी जमीन तलाश ली है? अपने दोनों बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी को जिस प्रकार लालू ने जन्मभूमि सारण प्रमंडल के इतर तिरहुत प्रमंडल में चुनाव मैदान में उतारा है, उससे सियासी गलियारे में इस आशय की जम कर चर्चा हो रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1952 में विधानसभा का पहला चुनाव जीतने वाले कर्पूरी ने दरभंगा प्रमंडल के अपने जन्मभूमि समस्तीपुर को ही अपनी सियासत का केंद्र बनाया था।
मगर वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में रामदेव राय के हाथों मिली हार के बाद अचानक उन्होंने तिरहुत प्रमंडल के सीतामढ़ी को अपनी राजनीति का केंद्र बना लिया था।
इसी प्रकार लालू ने तब छपरा से दूरी बनाई, जब बीते लोकसभा चुनाव में उनकी पत्नी राबड़ी देवी को भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से शिकस्त झेलनी पड़ी। इससे पहले लालू इसी सीट पर रूडी सहित अन्य नेताओं को सियासी पटखनी दे चुके थे।