गैस के लिए एजेंसी पहुंचे उपभोक्ता
सहरसा जिले में रसोई गैस की किल्लत और वितरण में मची अफरातफरी से आम जनता त्राहिमाम कर रही है। एक तरफ जिला प्रशासन ने शत-प्रतिशत होम डिलीवरी का दावा करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। चिलचिलाती धूप में उपभोक्ता ऑनलाइन पेमेंट करने के बावजूद अपनी गैस पर्ची कटवाने के लिए एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
प्रशासन का दावा, गोदामों पर मजिस्ट्रेट तैनात
जिलाधिकारी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में गैस वितरण को पारदर्शी बनाने का बड़ा दावा किया गया है। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए गोदाम या एजेंसी आने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, गैस की आपूर्ति सीधे घरों तक की जाएगी। इसके लिए सभी गैस गोदामों पर दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति भी कर दी गई है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में फिलहाल इंडेन की 11,107, एचपी की 6,314 और भारत गैस की 2,731 बुकिंग लंबित हैं। प्रशासन का दावा है कि अगले 3 से 5 दिनों में युद्धस्तर पर इस बैकलॉग को खत्म कर लिया जाएगा।
डिजिटल इंडिया के दौर में एजेंसी कर्मियों की मनमानी
प्रशासन के इन दावों की हवा गैस एजेंसियों के काउंटरों पर साफ निकलती दिख रही है। मुरादपुर निवासी मृत्युंजय मिश्र ने 25 मार्च को शहीद रमन गैस एजेंसी में गैस बुक की थी। 27 मार्च को जब वे पर्ची कटवाने पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर बैरंग लौटा दिया गया कि अभी 19 मार्च वालों को गैस दी जा रही है। डीएम के आदेश के बावजूद मृत्युंजय पर्ची के लिए एजेंसी पर खड़े रहने को विवश हैं। सहुरिया निवासी हरेराम चौधरी का मामला और भी हैरान करने वाला है। उन्होंने 29 मार्च को ऑनलाइन बुकिंग की और पूरा भुगतान भी कर दिया। उनके पास डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड भी आ गया। नियम के मुताबिक गैस सीधे उनके घर पहुंचनी चाहिए थी, लेकिन एजेंसी कर्मी उन्हें दो-तीन दिन बाद गैस आने की बात कहकर लगातार दौड़ा रहे हैं।
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प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि उपभोक्ताओं को एजेंसी नहीं आना है, तो एजेंसियों पर पर्ची कटवाने का यह खेल क्यों चल रहा है? ऑनलाइन पेमेंट और डीएससी कोड जनरेट होने के बाद भी होम डिलीवरी क्यों नहीं हो रही? प्रशासन भले ही कागजों पर सब कुछ दुरुस्त होने का दावा कर रहा हो, लेकिन चिलचिलाती धूप में पसीना बहाते उपभोक्ता बता रहे हैं कि एजेंसियों की मनमानी पर अब तक कोई लगाम नहीं लग सकी है।