प्रशासन की मदद से मक्का की फसल को किया जा रहा नष्ट
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मधेपुरा सदर प्रखंड के मुरहो नाढी गांव में तीन दशक से चले आ रहे भूमि विवाद का निपटारा करते हुए प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान दो बुलडोजर, चार ट्रैक्टर और भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में लगभग 10 एकड़ जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इस प्रक्रिया में खेतों में लगी मक्का और गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया गया, वहीं विवादित भूमि पर बने मकानों को भी गिरा दिया गया।
तीन दशक पुराना था भूमि विवाद
यह विवाद 1994 से सुभाष चंद्र यादव बनाम अशोक कुमार मंडल और नंदकुमार मंडल के बीच चला आ रहा था। मामला पूर्णिया जिले के धमदाहा कोर्ट में लंबित था, जहां 2009 में ही अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया था। इस फैसले के खिलाफ विपक्षी पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन पटना उच्च न्यायालय ने 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई
कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बुधवार को प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के दौरान मजिस्ट्रेट और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष पुलिस बल तैनात किया गया था।
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शांतिपूर्ण ढंग से हटाया गया अतिक्रमण
बुधवार को शुरू हुई इस कार्रवाई को गुरुवार को भी जारी रखा गया। गांव के विभिन्न हिस्सों में अवैध कब्जे को हटाने के लिए विशेष टीमें तैनात की गईं। इस दौरान विरोध की कुछ कोशिशें हुईं, लेकिन प्रशासन की सख्ती के आगे कोई सफल नहीं हो सका और कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की गई।
अवैध अतिक्रमण पर प्रशासन की सख्ती
तीस साल पुराने इस विवाद का निपटारा होने के बाद प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम तरनजोत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई भी सरकारी या निजी भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।