राजद के स्टैंड से उलट जदयू की राह।
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मुख्यमंत्री की ओर से अबतक शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर के नालंदा खुला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में रामचरितमानस के अपमान की जानकारी भले नहीं हुई हो और न ही उस समारोह में शिक्षा मंत्री की ओर से बच्चों को बैकवर्ड-फॉरवर्ड पढ़ाने की जानकारी आई है, लेकिन जनता दल यूनाइटेड के अंदर इसे लेकर अंडरकरंट है। राम और रामचरितमानस का विरोध कहां पहुंचा सकता है, शायद यह भी मालूम है। ऐसे में जदयू में फ्रंट फुट पर खेलने वाले राजनेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे भेज दिए गए नेता इसपर सामने आ रहे हैं। राज्य में मंत्री और पार्टी में प्रवक्ता की भूमिका निभा चुके विधान पार्षद नीरज कुमार ने शनिवार को महावीर मंदिर पहुंचकर रामचरितमानस का पाठ किया। इससे पहले, पूर्व प्रवक्ता निखिल मंडल गठबंधन धर्म का सम्मान करते हुए शिक्षा मंत्री से माफीनामा की मांग कर चुके हैं।
नीरज बोले- संविधान देखता, नेता धर्म में न घुसें
पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि अगर कहीं ऐसा लगता है कि किसी धर्मग्रंथ के कारण वास्तव में देश के अंदर वैमनस्यता फैल रही है तो संविधान उसे देखेगा। बिहार में राजनीति करने वाले इस तरह अपने हिसाब से रामचरितमानस की व्याख्या न ही करें तो बेहतर है। रामचरितमानस हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है और किसी भी हालत में ऐसे प्रतीकों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ घातक हो सकता है। महागठबंधन में शामिल राजद को इसपर संज्ञान लेना चाहिए, न कि किसी भी तरीके से इस बात का समर्थन करना चाहिए।