दिल्ली के बाद इस समय देशभर में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है बिहार की राजनीति। वहां चुनाव बेशक पांच-छह महीने शेष हैं लेकिन राजनीति के रंग पल पल बदल रहे हैं। बिहार की राजनीति एक ऐसी सांप सीढी की तरह हो चुकी है जिसका हर किरदार किसी को कभी भी डस ले।
बिहार के चाणक्य माने जाने वाले लालू यादव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ गलबहियां करके दोस्ती और दुश्मनी दोनों निभाने में लगे हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी खुद को किंग मेकर साबित करने में कसर नहीं छोड़ना चाहते।
राजनीतिक पंडित भी मानते हैं कि आगामी चुनाव में इन दोनों नेताओं की भूमिका खास रहने वाली है, शायद यही एहसास दोनों के रोज-रोज बदलते बयानों की बड़ी वजह भी है। दोनों में से कोई भी खुलकर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रहा है।
लालू जहां जनता परिवार का सदस्य बनने के बाद भी अपनी शर्तों को लेकर अड़े हुए हैं, वहीं मांझी कभी मोदी के गले मिलकर आते हैं तो कभी लालू को माला पहनाने के लिए तैयार रहते हैं। लालू और मांझी एक दूसरे पर डोरे डालने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे।