क्रिएटिविटी हर इंसान के अंदर होती है, बस उसे बाहर लाने की जरूरत होती है। पटना के दो भाइयों निलय सिंह और अंकुर सिंह ने वर्चुअल स्पेस में कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है।
फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट को टक्कर देने के लिए इन दोनों भाइयों ने शुद्ध देशी संस्करण जंपबुक तैयार किया है जो किसी भी मायने में फेसबुक से कम नहीं है।
पटना के कंकड़बाग में रहने वाले बीटेक के छात्र निलय सिंह और अंकुर सिंह दोनों भाई हैं। दोनों भाइयों ने मिलकर फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट तैयार की है। इसमें फेसबुक जैसी सारी सुविधाएं मौजूद हैं।
'सुरक्षा का रखा है ख्याल'
अमर उजाला से बात करते हुए निलय सिंह ने बताया कि जंपबुक में हमने सिक्योरिटी का पूरा ख्याल रखा है। इसमें बिना आपके अप्रूवल के कोई भी टाइम लाइन पर कुछ भी नहीं डाल सकता है।
निलय सिंह बताते हैं कि इसमें लॉगिन से पहले ही रीसेंटली जुड़े लोगों की लिस्ट दिख जाती है। उस लिस्ट को देखकर आप फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
निलय सिंह का दावा है कि इसे कोई दूसरा व्यक्ति हैक नहीं कर सकता है। खुलने से पहले इसमें एक आसान सवाल पूछा जाता है। उसका जवाब सिर्फ आदमी ही दे सकता है। कंप्यूटर इस सवाल का जवाब नहीं दे सकता है। सवाल का जवाब देने के साथ ही पासवर्ड भी डालना होता है। तभी यह खुलता है।
आड़े आ रही फंड की कमी
आगे की योजना पर बात करते हुए निलय थोड़ा उदास होकर बताते है कि हमारे पास फंड की समस्या है जिससे हम इसका विस्तार नहीं कर पा रहे हैं।
तीन महीने पहले शुरू किए जंपबुक में आज 32 हजार से ज्यादा यूजर्स हैं और दिन प्रति दिन इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसके कारण जंपबुक का सर्वर लोड नहीं ले पा रहा है। यूजर्स की संख्या इसी तादाद में बढ़ती रही तो अगले 1 साल में 15 लाख से ज्यादा यूजर्स हो जाएंगे।
पिछले 3 दिनों से हमारा सर्वर फंड के कारण बंद पड़ा था, लेकिन आज हमने 20 हजार रुपए कर्ज लेकर इसे चालू करवाया है। फंड को लेकर परेशान निलय कहते हैं कि न तो उन्हें इसके लिए कोई सरकारी आर्थिक मदद देने को तैयार है और न ही लोगों तक इस वेबसाइट की पहचान बनाने का इनके पास कोई जरिया है।
पैसों की किल्लत के चलते जंपबुक को पॉपुलर बनाने में भले ही इनको दिक्कतें आ रही हैं लेकिन इनके हौसले बुलंद हैं। अगर आप भी जंपबुक से जुड़ना चाहते है तो www.jumpbook.in पर जाएं।