बिहार के बोधगया के कालचक्र मैदान में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा 37 प्रैक्टिसेस ऑफ अ बोधिसत्व पर प्रवचन दिया। जिसमें हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे सहित निर्वासित तिब्बत सरकार के राष्ट्रपति लोबसांग सांगेय, सिक्किम सरकार के मंत्री नामग्याल, बौद्ध परंपरा के वरीय लामा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
चित्त की एक अवस्था है जिसमें शून्यता और करूणा आत्मा के प्रधान तत्व बन जाते हैं। एक दूसरे में मिलकर यह शून्यता और करुणा को प्रज्ञा और उपाय में बदल देते हैं। शून्यता पूर्ण ज्ञान की निशानी है। इसमें सांसारिक दुख खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि शून्यता को इसलिए लाभ कहते हैं क्योंकि शून्यता में प्रतिष्ठित होने वाला व्यक्ति ही प्रज्ञा प्राप्त करता है। असल में सब शून्य ही शून्य है। इस ज्ञान का उदय होने पर अविद्या खत्म हो जाती है।
प्रवचन के दौरान दलाई लामा ने चीन से आए श्रद्धालुओं से कहा कि शून्यता का आभास करें। दोस्ती और करुणा को जगाएं। इससे पहले 25 दिसंबर को दलाई लामा ने चीन से कहा था कि गोली की भाषा छोड़े और सच्चाई की दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाएं। सच्चाई से ही जीत मिलती है।