पूर्वजों और पुरखों की मोक्ष प्राप्ति की स्थली के रूप में प्रसिद्ध शहर गया में अब विदेश लोग भी पिंडदान करने पहुंच रहे हैं। विदेशी अपने पुरखों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान करने प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के समीप देवघाट पहुंचे। जर्मनी से आई 11 महिलाओं ने बुधवार को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अपने पितरों के मोक्ष के लिए पूरे सनातन धर्म के विधि-विधान के साथ कर्मकांड किया। ये महिलाएं अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की।
गौर ने कहा, पिंडदान करने आईं महिलाएं जर्मनी के अलग-अलग क्षेत्रों में रहती हैं. इनमें इरिना, औक्सना और आना समेत के 11 महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी को विश्वास है कि कर्मकांड करने से इनके पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलेगी। सभी जर्मनी महिलाओं ने साड़ी पहनकर भारतीय वेशभूषा में कर्मकांड किया।
इरिना ने कहा, भारत धर्म और अध्यात्म की धरती है। गया आकर मुझे आंतरिक शांति की अनुभूति हो रही है। मैं यहां अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आई हूं। पिछले साल रूस, स्पेन, जर्मनी, चीन, कजाकिस्तान से आए 27 विदेशी पर्यटकों ने भी अपने-अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान और तर्पण किया था।
लोकनाथ गौड़ कहते हैं कि हर साल पितृपक्ष के मौके पर विदेशी पर्यटकों का जत्था अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यह जत्था एक-दो दिन बिहार के पर्यटक स्थलों को देखने के बाद स्वदेश लौट जाएगा। सनातन धर्म में विश्वास करने वाले आश्विन महीने के कृष्णपक्ष (पितृपक्ष) में अपने पुरखों की आत्मा की शांति और उनके उद्धार (मोक्ष) के लिए लाखों लोग मोक्षस्थली गया में पिंडदान के लिए आते हैं। इस साल 14 अक्टूबर तक करीब आठ लाख श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की उम्मीद है।