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Bihar News: सीएसआर फंड से टायलेट निर्माण में बीआरबीसीएल में हुआ बड़ा घोटाला, सीबीआई ने तेज की जांच

Sun, 15 Sep 2024 03:58 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

Aurangabad News: शौचालय निर्माण घोटाले के मुख्य आरोपी के रूप में बीआरबीसीएल के पूर्व अपर महाप्रबंधक (कमीशनिंग) का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया और इसमें कई अन्य छोटे-बड़े अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
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सीबीआई - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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औरंगाबाद जिले में स्थित भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड (बीआरबीसीएल) के पावर प्लांट में सीएसआर (कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड से शौचालय निर्माण में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तेज कर दी है और आरोपियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

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क्या है शौचालय निर्माण घोटाला और क्यों हो रही जांच 
शौचालय निर्माण घोटाले के मुख्य आरोपी के रूप में बीआरबीसीएल के पूर्व अपर महाप्रबंधक (कमीशनिंग) राकेश कुमार उपाध्याय का नाम सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2015-16 के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया और इसमें कई अन्य छोटे-बड़े अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। सीबीआई की टीम, जो संयुक्त सचिव राजीव रंजन के नेतृत्व में काम कर रही है, ने नबीनगर स्थित पावर प्लांट में 12 घंटे से अधिक समय तक फाइलों की गहन जांच की।
 
सीबीआई ने अब तक 230 शौचालय निर्माण में घोटाले की जांच की है और इसमें बीआरबीसीएल के तत्कालीन एजीएम आरके उपाध्याय, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के सिंगरौली स्थित एनटीपीसी पावर प्लांट में पदस्थ हैं, को मुख्य आरोपी बनाया है। इसके अलावा, कोलकाता की कंपनी इंडिकॉन इंटरप्राइजेज और सब-कांट्रैक्टर रोहतास श्री जी इंटरप्राइजेज के सुशील कुमार पांडेय को भी आरोपी बनाया गया है।
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घोटाले में यह बात आई सामने 
जांच में खुलासा हुआ है कि सीएसआर फंड के तहत बनाए गए 230 शौचालयों में से कई का निर्माण हुआ ही नहीं। जो शौचालय बने भी थे, वे भी बेहद खराब गुणवत्ता के थे। कई स्कूलों में निर्धारित संख्या के मुकाबले कम शौचालय बनाए गए। ठेकेदार सुशील कुमार पांडेय ने भी स्वीकार किया है कि इलाके की दुर्गमता के कारण 30-40 शौचालयों का निर्माण संभव नहीं हो पाया।
 

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सीबीआई - फोटो : एएनआई (फाइल)
एनटीपीसी और सीबीआई की कार्रवाई 
एनटीपीसी की निगरानी शाखा में पहले शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद सीवीओ ने जांच की और मामला सीबीआई को सौंपा गया। 17 फरवरी 2022 को सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और बाद में केस को एसीबी पटना को ट्रांसफर कर दिया गया। 20 मई 2024 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। एनटीपीसी ने आरोपी एजीएम की वेतनमान में कटौती भी की है।
 
भाई के खाते में पाई गई अवैध राशि 
राकेश कुमार उपाध्याय पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई उमेश कुमार उपाध्याय के खाते में विभिन्न वर्षों के दौरान कुल 85.5 लाख रुपये की राशि जमा की। सब-कांट्रैक्टर सुशील कुमार पांडेय ने भी सीबीआई को बताया कि उसने उपाध्याय के कहने पर उसके भाई के खाते में 15 लाख रुपये जमा किए और उपाध्याय को पांच लाख रुपये नकद दिए।
 
हालांकि सीबीआई ने मामले में जांच तेज कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस जांच की आंच बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है। सीबीआई की जांच के नतीजे आने के बाद इस मामले में और भी बड़ी कार्रवाई की संभावना है।
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