एनटीपीसी और सीबीआई की कार्रवाई
एनटीपीसी की निगरानी शाखा में पहले शिकायत दर्ज की गई थी, जिसके बाद सीवीओ ने जांच की और मामला सीबीआई को सौंपा गया। 17 फरवरी 2022 को सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और बाद में केस को एसीबी पटना को ट्रांसफर कर दिया गया। 20 मई 2024 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। एनटीपीसी ने आरोपी एजीएम की वेतनमान में कटौती भी की है।
भाई के खाते में पाई गई अवैध राशि
राकेश कुमार उपाध्याय पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई उमेश कुमार उपाध्याय के खाते में विभिन्न वर्षों के दौरान कुल 85.5 लाख रुपये की राशि जमा की। सब-कांट्रैक्टर सुशील कुमार पांडेय ने भी सीबीआई को बताया कि उसने उपाध्याय के कहने पर उसके भाई के खाते में 15 लाख रुपये जमा किए और उपाध्याय को पांच लाख रुपये नकद दिए।
हालांकि सीबीआई ने मामले में जांच तेज कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इस जांच की आंच बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है। सीबीआई की जांच के नतीजे आने के बाद इस मामले में और भी बड़ी कार्रवाई की संभावना है।