बिहार चुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ जेडीयू को जोरदार झटका दे दिया है। जेडीयू के चार विधायकों ने नीतीश का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। चारों विधायकों ने नीतीश कुमार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया।
चारों विधायकों ने केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता राजीव प्रताप रूढ़ी और अन्य प्रदेश स्तरीय नेताओं के समक्ष पटना में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वहीं इन सबसे बेखबर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को केजरीवाल के साथ एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए दिल्ली पहुंच गए।
जिन चार विधायकों ने भाजपा का दामन थामा है उनमें सुरेश चंचल, ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू, राजेश्वर राज और पूर्व मंत्री दिनेश प्रसाद शामिल हैं।
नीतीश पर जड़े संगीन आरोप
भाजपा की सदस्यता लेते समय ज्ञानेन्द्र ज्ञानू ने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें जेडीयू में घुटन महसूस होने लगी थी। कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पा रहा था। इसलिए उन्होंने जेडीयू को छोड़ने का फैसला लिया।
वहीं पूर्व मंत्री और मीनापुर से विधायक दिनेश प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने सिद्धांतों को ताक पर रखकर लालू यादव के साथ समझौता किया है। इसलिए इस बेमेल गठबंधन का हिस्सा बनने का अब कोई फायदा नहीं।
बता दें कि नीतीश का साथ छोड़ने वाले विधायकों में सुरेश चंचल सकरा से, ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू बाढ़ से, राजेश्वर राज काराकाट से और पूर्व मंत्री रहे दिनेश प्रसाद मीनापुर से विधायक हैं।
नीतीश के वफादार रहे हैं चारों विधायक
चारों विधायकों की गिनती काफी नीतीश कुमार के वफादारों में होती थी। ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू तो राजनीति की शुरूआत से ही नीतीश कुमार के साथ रहे हैं।
बता दें कि इससे पूर्व भी जब पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जेडीयू छोड़ी थी तो नीतीश के 20 विधायक जिनमें कई मंत्री भी थे उनका साथ छोड़कर मांझी के साथ हो लिए थे। इसके अलावा पूर्व में भी कई विधायकों ने पार्टी छोड़कर खुली बगावत कर दी थी।
हालांकि राज्य में कभी अपने कट्टर प्रतिद्वंदी रहे लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे नीतीश इन सबसे बेखबर दिखाई दे रहे हैं। बुधवार को विधायकों की घोषणा होने से पूर्व ही वह दिल्ली के लिए निकल चुके थे। जहां पहुंचकर आज शाम वे दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ भोजपुरी मैथिली सम्मेलन में शिरकत करेंगे।