बिहार की राजनीति में मुखर और बागी नेता के रूप में पहचान रखने वाली रितु जायसवाल ने अब भारतीय जनता पार्टी के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू कर चुकी है। मंगलवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा में शामिल होने के बाद रितु जायसवाल ने कहा कि उन्हें पुराने वीडियो और बयानों को लेकर ट्रोल किया जाएगा, लेकिन वह इससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब मैंने परिहार विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया था, तब भी लोगों ने मुझे बागी कहा था। लेकिन उस समय परिहार की जनता बदलाव चाहती थी और मुझे 65 हजार वोट मिले थे।
उन्होंने भाजपा में शामिल होने के फैसले को राष्ट्रहित से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है जो राष्ट्र को सबसे ऊपर रखती है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और नेतृत्व की भी सराहना की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मौके पर कहा कि यदि भाजपा ने अपने दरवाजे पूरी तरह खोल दिए तो राजद के पास नेता नहीं बचेंगे। उन्होंने कहा कि रितु जायसवाल जैसी मजबूत और जनाधार वाली नेता के आने से भाजपा को मजबूती मिलेगी।
ऐसे शुरू हुई भाजपा में आने की बातचीत
सबसे पहले 'अमर उजाला' ने बताया था कि राजद की बागी रितु जायसवाल भाजपा ज्वाइन कर रही हैं। इसके बाद रितु ने 'अमर उजाला' से बातचीत में बताया था कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल होने जा रही हैं। उन्होंने बताया था कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से उनकी मुलाकात एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दरअसल, 13 मार्च 2026 को उनके भाई रजनीश जायसवाल की फिल्म ‘कोर्ट कचहरी’ के प्रमोशन कार्यक्रम में संजय सरावगी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। इसी मुलाकात के दौरान राजनीतिक चर्चा आगे बढ़ी और भाजपा में शामिल होने की बातचीत शुरू हुई।
बागी और मुखर नेता के रूप में पहचान
रितु जायसवाल बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही हैं। वह सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी ग्राम पंचायत की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मुखिया रह चुकी हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिवहर सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने परिहार सीट से निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई थी। राजद द्वारा छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद उनके सामने राजनीतिक भविष्य को लेकर चुनौती थी। ऐसे में लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बजाय उन्होंने भाजपा के साथ जुड़ने का फैसला लिया।