साल 2015 में विधानसभा चुनाव में मौजूदा केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस को हराकर विधायक बनने वाले चंदन कुमार ने तब बिहार की राजनीति में खलबली मचा दी थी। आज हाल ये है कि उन्हें मुखिया के चुनाव में भी करारी हार का सामना करना पड़ा है।
राजनीति में समय किस तरह बदलता है इसका बड़ा उदाहरण बिहार में देखने को मिला है। यहां एक समय में विधायकी के चुनाव में पशुपति कुमार पारस को हराने वाले चंदन कुमार उर्फ चंदन राम पंचायत चुनाव में भी जीत नहीं दर्ज कर पाए।
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अलौली के पूर्व विधायक चंदन कुमार तेताराबाद पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनाव लड़े थे। परिणामों के बारे में सभी आश्वस्त थे कि पूर्व विधायक ही यह चुनाव जीतेंगे। लेकिन जब परिणाम सामने आए तो अलग ही तस्वीर देखने के लिए मिली।
मिले महज 567 वोट, भाई को भी करना पड़ा हार का सामना
उन्हें उनके ही पूर्व प्रतिनिधि नंदकेश कुमार उर्फ मुन्ना ने 1300 वोटों से हरा दिया। चंदन कुमार को जहां 567 वोट मिले वहीं नंदकेश को 1737 मत प्राप्त हुए। पूर्व विधायक ने इसे जनता का फैसला बताया है लेकिन कोई विशेष टिप्पणी नहीं की।
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पूर्व विधायक के भाई पिंटू राम भी जिला पंचायत क्षेत्र संख्या 4 से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। पिंटू राम ने इस जिला पंचायत क्षेत्र से पिछले चुनाव में जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार जनता ने उन्हें नकार दिया।
करीब 27 हजार मतों से दी थी पशुपति कुमार पारस को मात
साल 2015 के विधानसभा चुनाव में लालू यादव ने अलौली विधानसभा से चंदन राम को राजद का उम्मीदवार बनाया था। तब उन्होंने वर्तमान केंद्रीय मंत्री पशुपति किमार पारस हो हराया था। उस समय अलौली सीट पशुपति कुमार के पास ही थी।
चंदनराम को जब लालू यादव ने टिकट दिया था तब वह एक नियोजित शिक्षक थे। तब विधानसाभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की लहर कुछ ऐसी चली थी कि तब पशुपति कुमार पारस को चंदन कुमार ने करीब 27 हजार वोटों से हरा दिया था।