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बिहार: ट्रेन ठहराव की मांग को लेकर स्टेशन पर धरना, खराब मौसम में भी जुटी भीड़; आंदोलन तेज करने की चेतावनी

Sun, 27 Sep 2026 08:09 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मधुबनी

सार

मधुबनी के घोघरडीहा रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर मिथिलांचल संघर्ष समिति ने एक दिवसीय धरना दिया। खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
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मिथिलांचल संघर्ष समिति के लोग धरना करते हुए।
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विस्तार
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मधुबनी जिले के घोघरडीहा रेलवे स्टेशन पर मिथिलांचल संघर्ष समिति की ओर से लंबी दूरी की ट्रेन की मांग सहित आठ सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरने का आयोजन किया गया। खराब मौसम के बावजूद सैकड़ों की संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर धरना कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई।

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मिथिलांचल संघर्ष समिति के अध्यक्ष गौरीशंकर यादव ने बताया कि इस रेलवे स्टेशन के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है। उन्होंने अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरने का आयोजन किया। इसको लेकर पूर्व में ही स्टेशन अधीक्षक को सूचना दी गई थी।

उन्होंने बताया कि मिथिलांचल संघर्ष समिति की ओर से घोघरडीहा रेलवे स्टेशन पर न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर ट्रेन, सहरसा-अमृतसर ट्रेन और अमृतसर-कटिहार जैसी ट्रेनों के ठहराव, चिकना रेलवे स्टेशन पर जोगबनी-दानापुर एक्सप्रेस ट्रेन के ठहराव, घोघरडीहा स्टेशन पर पार्सल गोदाम की मांग तथा परसा बसवारी रेलवे हॉल्ट पर यात्री सुविधाओं को बहाल करने जैसी विभिन्न मांगों को लेकर धरना दिया गया है।

काफी दूरी से लोग इस स्टेशन से ट्रेन पकड़ने के लिए आते हैं और लंबी दूरी की ट्रेन नहीं होने की वजह से लोगों को सकरी, झंझारपुर और दरभंगा जाना पड़ता है, जिससे गरीब और ग्रामीण लोगों को काफी परेशानी होती है। लंबी दूरी की ट्रेन होने से लोगों को यात्रा करने में सहूलियत होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मांगों पर विचार नहीं किया जाता और ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित नहीं किया जाता है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। स्टेशन अधीक्षक को ज्ञापन और मांग पत्र सौंपा गया है।

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बता दें कि लंबी दूरी की ट्रेन की मांग को लेकर एक सप्ताह पूर्व भी मारे रेलवे स्टेशन पर धरने का आयोजन किया गया था। बड़ी लाइन होने के बावजूद लंबी दूरी की ट्रेन नहीं दिए जाने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और खर्च भी अधिक उठाना पड़ता है। अब देखना है कि आज का यह धरना कितना कारगर साबित होता है और रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव कब सुनिश्चित हो पाता है।

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