दरभंगा जिले के भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र अलीनगर प्रखंड के किरतपुर प्राथमिक विद्यालय का पिलर डेस्क और बेंच के सहारे खड़ा है, वहीं स्कूल में पढ़ने वाले करीब 1200 बच्चे डर के साये में टिन के शेड में पढ़ने को मजबूर हैं। तस्वीर सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश कर रही है।
प्राथमिक विद्यालय किरतपुर के भवन की हालत सिर्फ एक पिलर तक सीमित नहीं है। छत से बारिश का पानी टपकता है, जगह-जगह प्लास्टर उखड़ चुका है, बीम और पिलर जर्जर हैं और सरिया तक दिखाई देने लगे हैं। कई हिस्सों से प्लास्टर गिर चुका है। जर्जर भवन के कारण बच्चों के साथ-साथ शिक्षक भी डर के माहौल में पढ़ाने को मजबूर हैं।
इस स्कूल में करीब 191 बच्चे नामांकित
हैरानी की बात यह भी है कि जिस कमरे में बच्चों की पढ़ाई होती है, उसी कमरे में लकड़ी का जलावन और गोबर के उपले रखे हुए दिखाई दिए। इससे स्कूल के रखरखाव और बच्चों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक वातावरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्कूल के सहायक शिक्षक पवन कुमार चौधरी के मुताबिक, भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और इसकी जानकारी विभाग के अधिकारियों से लेकर वरीय अधिकारियों तक दी जा चुकी है। ग्रामीण भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका कहना है कि ध्वस्त पिलर की जगह बेंच-डेस्क और ईंटों से अस्थायी सहारा दिया गया है, लेकिन इससे खतरा टला नहीं है।
अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे
शिक्षक के अनुसार स्कूल में कुल 10 शिक्षक और 191 विद्यार्थी हैं। हालांकि, जनगणना कार्य सहित अन्य कारणों से सभी शिक्षकों की उपस्थिति हर दिन एक जैसी नहीं रहती। वहीं, शिक्षक संजीव कुमार ने बताया कि जगह की कमी के कारण एक कमरे में तीन कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना पड़ रहा है, जिससे पढ़ाई में परेशानी होती है।
स्थानीय ग्रामीण और अभिभावक दुखी कुमार यादव ने कहा कि भवन निर्माण को लेकर ग्रामीण कई बार आवाज उठा चुके हैं और धरना-प्रदर्शन भी किया गया है। उनका कहना है कि जर्जर भवन के कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल भवन का निरीक्षण कर जल्द नया भवन बनाने की मांग की है।
वहीं, पांचवीं कक्षा की छात्रा राधिका कुमारी ने बताया कि शिक्षक अच्छी तरह पढ़ाते हैं, लेकिन स्कूल की बिल्डिंग खराब होने के कारण हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं भवन गिर न जाए। दूसरी कक्षा की छात्रा आरोही कुमारी ने भी बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की बात कही।
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स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया कि स्कूल भवन के जर्जर होने का मामला विधानसभा में भी उठाया गया है और अब जिला स्तर से भवन को ध्वस्त कर नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, स्कूल भवन के पुनर्निर्माण की ठोस समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
अब सवाल यह है कि जिस भवन को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा का केंद्र होना चाहिए, वहां बेंच-डेस्क और ईंटों के सहारे छत का भार रोकने की नौबत आखिर क्यों आई? और 191 बच्चों की सुरक्षा के लिए नए भवन का इंतजार कब खत्म होगा?