फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: बीमार बेटी के इलाज के लिए घंटों अस्पताल में भटकती रही मां, वीडियो बनाते रहे डॉक्टर; सरकारी दावे फिर फेल

Tue, 01 Jul 2025 10:24 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर

सार

Bihar: बारिश के दौरान भी महिला अपनी बेटी को स्ट्रेचर पर लिए कभी इमरजेंसी तो कभी महिला वार्ड के चक्कर लगाती रही, लेकिन कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मदद के लिए आगे नहीं आया। हद तो तब हो गई जब मरीज बारिश में भीग रही थी और इस बीच इमरजेंसी वार्ड में तैनात एक डॉक्टर इलाज करने के बजाय वीडियो बनाता नजर आया।

विज्ञापन
बेटी को अस्पताल में लेकर भटकती रही मां - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार में सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। ताजा मामला समस्तीपुर सदर अस्पताल का है, जहां बारिश में भीगती एक बुजुर्ग महिला अपनी बीमार बेटी के इलाज के लिए घंटों अस्पताल में भटकती रही, लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उसकी सुध तक नहीं ली।

पूरा घटनाक्रम सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के ठीक सामने का है। जानकारी के मुताबिक मथुरापुर थाना क्षेत्र के सारी गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला अपनी बेटी अंजनी कुमारी को बेहोशी की हालत में इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के बजाय डॉक्टरों ने घंटों उसे इधर-उधर दौड़ाते रखा।

विज्ञापन


पढ़ें: कोचस नगर पंचायत उपचुनाव, मतगणना संपन्न, विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों ने मनाया जश्न

बारिश के दौरान भी महिला अपनी बेटी को स्ट्रेचर पर लिए कभी इमरजेंसी तो कभी महिला वार्ड के चक्कर लगाती रही, लेकिन कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मदद के लिए आगे नहीं आया। हद तो तब हो गई जब मरीज बारिश में भीग रही थी और इस बीच इमरजेंसी वार्ड में तैनात एक डॉक्टर इलाज करने के बजाय वीडियो बनाता नजर आया।

बुजुर्ग मां ने बताया कि बेटी घर में बातचीत के दौरान अचानक बेहोश हो गई थी, जिसके बाद वह उसे लेकर समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंची। लेकिन यहां दो घंटे तक भी उसे भर्ती नहीं किया गया। गरीब और दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीद में सदर अस्पताल आना पड़ता है, लेकिन अक्सर उन्हें इस तरह की लापरवाही और उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। आए दिन ऐसी लापरवाहियां सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें