उन्होंने कहा कि युवा वकीलों को प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानियों के निहित गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो वकील थे। कई स्वतंत्रता सेनानी कानूनी पेशे से थे। युवा वकीलों की समाज में बड़ी भूमिका होती है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने कहा कि वकीलों को सोचने में तर्कसंगत और स्वभाव में और तथ्य खोजने में होना चाहिए। वे पटना में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। CJI ललित ने कहा कि अधिवक्ताओं का उद्देश्य कानून के शासन को बनाए रखना होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि वकीलों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनका उद्देश्य और आदर्श कानून का पालन करना और कानून के शासन को बनाए रखना होना चाहिए। अधिवक्ताओं के पास जनता के दिमाग में मौलिक जानकारियों को पहुंचाने और समझाने का एक अद्भुत गुण है। उन्हें सोच में तर्कसंगत और स्वभाव से तथ्यान्वेषी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा वकीलों को प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानियों के निहित गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो वकील थे। कई स्वतंत्रता सेनानी कानूनी पेशे से थे। युवा वकीलों की समाज में बड़ी भूमिका होती है।
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इस दौरान केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका राष्ट्र के हित में काम कर रही हैं। तीनों स्तंभों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
लंबित मामलों को कम करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। रिजिजू ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से देश में 1,800 फास्ट-ट्रैक अदालतों के शीघ्र कामकाज के लिए अपील की।