विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 12 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए प्रचार शनिवार के शाम पांच बजे थम गया। इस चरण में दस जिलों के 49 विधानसभा क्षेत्र में मतदान होगा।
एक करोड़ 35 लाख से अधिक मतदाता 583 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। नक्सल ग्रस्त जिलों में जहां तीन बजे तक मतदान तय किया गया है, उन जिलों में शनिवार को तीन बजे ही चुनाव प्रचार बंद हो गया।
बिहार की जनता का मूड क्या होगा इसको लेकर नेताओं और उनके लिए रणनीति बना रहे रणनीतिकारों के लिए भी पहला चरण बहुत महत्वपूर्ण है। जातीय समीकरण साधने और हिस्सेदारी लेने के लिए जाति की बात जो हो रही हो, लेकिन पहले चरण में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। वहीं, कांग्रेस के पास कहलगांव का गढ़ बचाने की चुनौती है।
जिन अपराधग्रस्त क्षेत्रों में मतदान चार बजे तक होगा, वहां शनिवार को चार बजे ही चुनाव प्रचार थम गया। इधर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा व जमुई जिले में होनेवाले मतदान के लिए पुलिस प्रशासन ने भी कमर कस रखी है।
पुलिस चुनावों में किसी भी तरह की घटना को रोकने के लिए मुस्तैदी के साथ डटी हुई है। पहले चरण में जातीय समीकरण के मोर्चे पर राजग मजबूत है, लेकिन नेतृत्व व चेहरे को लेकर नरेंद्र मोदी व नीतीश कुमार आमने-सामने हैं।