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Bihar News: औरंगाबाद में महादलितों के मकानों पर चला बुलडोजर; मुंडवा गांव के एक दर्जन परिवार हुए बेघर

Mon, 12 Jun 2023 04:12 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद

सार

बेघर हुए महादलित नंदू ने बताया कि हम लोगों के पास अब रहने के लिए जगह नहीं है। रहने के लिए अगर थोड़ी सी जमीन मिल जाती तो सरकार की हम महादलित परिवारों पर मेहरबानी होती। एक अन्य महिला सुमित्रा देवी ने कहा कि अब हम कहां रहेंगे। इस भीषण गर्मी और लू में अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं।
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मकान को तोड़ता बुल्डोजर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में औरंगाबाद के गोह प्रखंड के मुंडवा गांव में सोमवार को एक दर्जन महादलितों के घरों पर बुलडोजर चला दिया गया। इसे लेकर सीओ का अंदाज बेहद क्रूर बताया जा रहा है। सीओ सोमवार को भारी मात्रा में पुलिस बल को लेकर मौके पर पहुंचे। फिर उन्होंने अपनी देखरेख में एक-एक कर 11 महादलितों के आशियानों को बुलडोजर से जमींदोज करवा दिया। गौरतलब है कि जगह पर महादलितों के बने आशियाने उजाड़े गए, उन्हें नब्बे के दशक में इंदिरा आवास योजना के तहत बनाया गया था।

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भीषण गर्मी में बेघर हुए 11 परिवार
महादलित परिवारों के लोग अब बेघर होकर भीषण गर्मी में खुले आसमान के तले आ गए हैं। उनका कोई हाल पूछने वाला नहीं है। जबकि पिछले साल ही बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने घोषणा की थी कि गरीबों के आशियाने उजाड़ने से पहले सरकार उन्हें बसाने का प्रबंध करेगी। इसके उलट गोह के सीओ के नेतृत्व में मुंडवा के महादलितों के मकानों को बुल्डोजर से ढहा दिया गया। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर मुंडवा के महादलित कहां बसाए जाएंगे? जबकि जिस जमीन से उन्हें बेदखल किया गया है, उस पर वे लोग साल 1975 से बसे हैं। सरकार ने इन लोगों को 1995 में ही इंदिरा आवास योजना के तहत मकान दिए थे। एक सवाल यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर भूमिहीन दलितों को बेदखल करने का कानून क्या है?

शनिवार की रात थमाया नोटिस, 48 घंटे बाद बेदखली
दरअसल, शनिवार की रात करीब नौ बजे पुलिस बल के साथ अंचल कार्यालय का एक कर्मचारी मुंडवा गांव पहुंचा था। वह महादलितों को नोटिस थमा कर चला गया था। नोटिस में 48 घंटे के अंदर मकान खाली करने की चेतावनी दी गई थी। उसके ठीक 48 घंटे बाद कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया। इस मामले में एक और सवाल उठ रहा है कि  आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी कि रात के नौ बजे नोटिस भेजा गया। फिर 48 घंटे बाद मकानों को ढहा दिया गया। हालांकि मुंडवा के पीड़ित महादलितों ने इसे तुगलकी फरमान बताया है और इसके खिलाफ वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
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बेघर हुए एक महादलित नंदू ने बताया कि हम लोगों के पास अब रहने के लिए जगह नहीं है। रहने के लिए अगर थोड़ी सी जमीन मिल जाती तो सरकार की हम महादलित परिवारों पर मेहरबानी होती। वहीं, एक अन्य परिवार की महिला सुमित्रा देवी ने बिफरते हुए कहा कि अब हम कहां रहेंगे। इस भीषण गर्मी और लू में अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं।

‘मुख्य सचिव ने दिया था अतिक्रमण हटाने का आदेश’
वहीं, इस मामले को लेकर सीओ मुकेश कुमार का कहना है कि नौ जून को सरकारी आदेश आया था कि गैरमजरुआ आम आहर और पिंड का अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण किया गया है। मामला मुख्यमंत्री जनता दरबार से भी संबंधित है। उसपर मुख्य सचिव द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए तीन दिनों के अंदर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था। इसी आदेश का पालन करते हुए अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।

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