गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भाजपा और जदयू में जुबानी जंग तेज हो गई है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भाजपा के पलटवार के ठीक एक दिन बाद अब जदयू अपने तीखे बाणों के साथ फिर से मैदान में उतर आया है।
पार्टी ने चेतावनी के लहजे में कहा कि भाजपा को गठबंधन के सहयोगी दलों का अपमान करना बंद करना चाहिए। जदयू ने यहां तक कह दिया कि किसी को खूंटे से बांधा नहीं है और जिसे जाना है वह जा सकता है।
इसे भाजपा के लिए जदयू का सीधा संदेश माना जा रहा है। लगातार तल्ख होते संबंधों के बाद भाजपा भी मानने लगी है कि मौजूदा परिस्थितियों में अब जदयू का साथ निभा पाना आसान नहीं है।
इसलिए पार्टी में इस बात पर लगभग सहमति दिख रही है कि यदि जदयू खुद अलग राह पकड़ता है तो उसे जाने दिया जाएगा। भाजपा अपनी तरफ से गठबंधन को तोड़ने की पहल नहीं करेगी।
यही वजह है कि अब तक जदयू को सबसे पुराना व विश्वसनीय सहयोगी बताने वाले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के सुर भी मंगलवार को कुछ बदले-बदले से दिखे।
जदयू के साथ संबंधों को लेकर राजनाथ ने कहा कि पार्टी उचित समय पर फैसला करेगी। इससे साफ है कि जुबानी तकरार के चलते भाजपा और जदयू के बीच संबंध अब पहले जैसा सामान्य नहीं है।
जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मोदी को खरी खोटी सुना चुके नीतीश को भाजपा ने सोमवार को करारा जवाब दिया था।
नीतीश के करीबी व जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने भी मंगलवार को बिहार में भाजपा पर पलटवार कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को राष्ट्रीय पार्टी होने का मुगालता भी नहीं पालना चाहिए।
हम एक राज्य में सरकार चला रहे हैं तो भाजपा भी मात्र चार राज्यों में सत्ता में है। गठबंधन की गेंद भाजपा के पाले में गेंद डालते हुए तिवारी ने कहा कि किसी को बांध कर नहीं रखा गया है, जिसे जाना है वह जा सकता है।
नीतीश ने निशाना साधा
नीतीश कुमार ने भाजपा यानी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि गुजरात दंगों के दौरान वह रेल मंत्री जरूर थे लेकिन राज्य में न्याय और कानून की व्यवस्था करना मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी होती है।
कुमार ने कहा कि रेल मंत्री की जिम्मेदारी रेल सुरक्षा है लेकिन न्याय और कानून की व्यवस्था पूरी तरह राज्य का मामला है।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी दंगों के दौरान नीतीश के एनडीए सरकार में बने रहने पर सवालिया निशान उठाए हैं, जिस पर कुमार ने यादव को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि वह इस मसले पर उन्हें विस्तार से जवाब दे चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि दंगों के दौरान एनडीए शासन में नीतीश रेल मंत्री बने रहे थे और उन्होंने अपना इस्तीफा नहीं सौंपा था। इसी बात को लेकर भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने उनकी करारी आलोचना की थी।
लेखी ने कहा था कि धर्मनिरपेक्षता के मामले में उन्हें नीतीश के सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है। नीतीश दंगों के बाद भी एनडीए सरकार में मंत्री बने रहे और अब वह इस मसले पर धर्मनिरपेक्षता का रोना रो रहे हैं।
जदयू के सम्मेलन में नीतीश ने भाजपा से आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी धर्मनिरपेक्ष छवि के नेता को सामने लाने के लिए कहा था।