बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार।
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जनता दल यूनाईटेड कोटे से ताजा-ताजा मंत्री बने रत्नेश सदा अपने बयान पर अब शायद ही कायम रह सकेंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और पुराने मंत्री श्रवण कुमार ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक का समर्थन कर दिया है। सत्ताधारी राजद का पाठक के खिलाफ स्टैंड देख भाजपा ने IAS केके पाठक का पहले ही समर्थन किया था। अब जदयू ने भी उसी राग में पाठक का समर्थन कर राजनीतिक गहमागहमी बढ़ा दी है। राम और रामचरितमानस पर सवाल उठाकर सुर्खियों में रहने वाले शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर को पाठक के खिलाफ राजद विधायक भाई वीरेंद्र का साथ मिला है। उन्होंने कहा कि भाई वीरेंद्र ने कहा कि शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर की फजीहत करवा रहे हैं केके पाठक। यह एक तरह से प्रताड़ना है। मुख्यमंत्री से अपील है कि फौरन केके पाठक का तबादला कर दिया जाए।
बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी केके पाठक का खुलकर समर्थन किया है और शिक्षा मंत्री के लेटर का भी विरोध किया। कहा कि बिहार का हर बंदा जानता है कि केके पाठक कितने कड़क अधिकारी हैं। वह हर कार्रवाई अपने अनुभव के आधार पर निष्पक्ष होकर और नियमों के अनुसार करते हैं। अब शिक्षा मंत्री और उनके बीच क्या मामला है, इसके बारे में मैं नहीं जानता हूं।
भाजपा ने शिक्षा मंत्री पर जमकर साधा निशाना
इधर, भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने इस मामले में शिक्षा मंत्री पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बिहार के बुड़बक शिक्षामंत्री विभाग के आईएएस सचिव को पीत-पत्र गैर-आधिकारिक पर्सनल सेक्रेटरी से लिखवा रहे हैं। फिर गोपनीय पत्र को मीडिया में सार्वजनिक भी करवा दिया। मंत्रीजी दु:खी हैं। जून बीत गया, एक भी ट्रांसफर- पोस्टिंग नहीं कर पाए। 10-12 करोड़ का उगाही- वसूली रुक गया। बिहार के बड़बोले शिक्षामंत्री अपनी अक्षमता का ठीकरा आईएएस पर फोड़ रहे हैं। छात्रों का जीवन बर्बादकर पल्ला मत झाड़ो। शिक्षा विभाग के हर निर्णय के लिए सीएम, डिप्टी सीएम, शिक्षामंत्री दोषी है। यह हरकत बिहार मंत्रीपरिषद् के सदस्य के पद-गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन नहीं है?