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Bihar: मौसम ने ली करवट, तेज ठंडी हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू, किसानों को फसल नुकसान का सताने लगा है डर

Fri, 31 Mar 2023 09:17 AM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

बिहार में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है। शुक्रवार की अहले सुबह से ही तेज ठंडी हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गया है। इस बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने पूर्व में ही कई जिलों में मौसम बदलने को लेकर अलर्ट किया था।
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मौसम ने ली करवट, तेज ठंडी हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है। शुक्रवार की अहले सुबह से ही तेज ठंडी हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गया है। इस बेमौसम बरसात ने किसानों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस बेमौसम बरसात से खेत में लगे गेहूं, मकई, सरसों, अरहर सहित रवि की अन्य फसलें चौपट होने के आसार बढ़ गये हैं। इससे पहले भी मार्च के महीने में बिहार में बूंदाबांदी से किसानों के फसलों का काफी नुकसान हो चुका है।

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मौसम विभाग ने किया था अलर्ट
मौसम विभाग ने पूर्व में ही 31 मार्च और 1 अप्रैल को राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई थी। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के करीब आधा दर्जन से अधिक जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन जिलों में पटना, गया, नालंदा, नवादा, अरवल, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर और रोहतास शामिल है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने किसानों को दी चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने का सुझाव दिया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 10 से 15 MM बारिश होने की संभावना है। इसका सबसे बुरा असर फसल पर पड़ेगा। इससे पहले मार्च के मध्य सप्ताह में भी बारिश से राज्य के 29 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान हुआ था।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री ने की राहत देने की घोषणा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आपदा प्रबंधन विभाग और कृषि विभाग के साथ बैठक कर बेमौसम बरसात से किसानों के फसल को क्षति होने पर किसानों को राहत देने की बात कही थी। इसके लिए उन्होंने 6 जिलों में सर्वेक्षण रिपोर्ट भी प्राप्त किया था। जिनमें गया, मुजफ्फरपुर, रोहतास, शिवहर,सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण जिला शामिल है। इन जिलों में 30% से अधिक फसल की क्षति हुई थी। इसके लिए सरकार ने 92 करोड़ की राशि कृषि विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, ताकि समय पर किसानों को फसल की क्षति का भरपाई किया जा सके।
 
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