किशनगंज लोकसभा सीट पर लगातार चुनौती झेल रहे NDA के लिए 2029 का चुनाव अभी से अहम होता दिख रहा है। 2024 में NDA के खाते में आई इस सीट पर JDU प्रत्याशी मुजाहिद आलम को कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद जावेद से 59,692 वोटों के अंतर से हार मिली थी। अब इसी हार के बाद JDU ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति पर अभी से काम शुरू करने के संकेत दिए हैं।
JDU जिलाध्यक्ष फैसल अहमद ने पार्टी कार्यकर्ताओं को पंचायत से लेकर गांव और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के साथ-साथ एक-एक मतदाता तक पहुंच बनाने का फॉर्मूला दिया है। यानी जिस लोकसभा सीट पर 2024 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, वहां अब चुनाव से काफी पहले ही संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पार्टी को हार का सामना करना पड़ा
फॉर्मूला सीधे तौर पर 2029 की चुनौती से जोड़कर देखा जा रहा
ऐसे में फैसल अहमद का हर वोटर तक पहुंच बनाने वाला फॉर्मूला सीधे तौर पर 2029 की चुनौती से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी अब बड़े चुनावी कार्यक्रमों के बजाय गांव, पंचायत और बूथ स्तर पर लगातार संपर्क बनाने की रणनीति पर जोर देती नजर आ रही है।
फैसल अहमद ने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन की ताकत केवल बड़े मंचों से नहीं, बल्कि जमीन पर लोगों के बीच लगातार मौजूद रहने से बनती है। कार्यकर्ताओं को लोगों की समस्याएं सुनने, उनसे संवाद बढ़ाने और उन्हें संगठन से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई है।
राजनीतिक तौर पर देखें तो 2024 की हार के बाद JDU के सामने सबसे बड़ी चुनौती किशनगंज में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करना और अगले लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाना है। पार्टी का ताजा फॉर्मूला इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
अब दिलचस्प सवाल यह है कि क्या 2024 की हार से सबक लेकर JDU ने 2029 की तैयारी चार साल पहले ही शुरू कर दी है? क्या बूथ और पंचायत स्तर तक पहुंच बनाने की यह रणनीति किशनगंज में NDA के लंबे जीत के इंतजार को खत्म कर पाएगी? फिलहाल पार्टी की रणनीति ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर किशनगंज की सियासत में चर्चा जरूर तेज कर दी है।