रविवार को सूरज की तपिश जब चरम पर है, पटना में राज्यभर के शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। विधानमंडल सत्र के दौरान प्रदर्शन पर बंदिशें रहती हैं, लेकिन अभी आवाजाही पर रोक नहीं है। हर तरफ से आ रहे हैं। सैकड़ों गर्दनीबाग में धरनास्थल पर हैं। कुछ पेड़ों की छांव में तो कुछ आसपास के भवनों में बैठे हैं। संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजीत भारती, परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवशी और टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक राजू सिंह ने कहा कि बिहार के तमाम नियोजित शिक्षक अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी पूर्वक करते आ रहे हैं लेकिन बिहार सरकार द्वारा नई नियमावली जारी की गई। इसमें पूर्व से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को नियोजन इकाई के अधीन ही छोड़ दिया गया। यह विश्वासघात है। शिक्षा मंत्री और सत्तारूढ़ दलों द्वारा नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा देने का वादा किया गया था लेकिन इस नियमावली में ऐसा नहीं किया गया। कैमूर से आए शिक्षक अभ्यर्थी राजीव कुमार ने कहा कि राज्य में कार्यरत सभी नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्षों को राज्य कर्मी का दर्जा दें। साथ ही समान काम के लिए समान वेतन दें।
प्रदर्शन करते शिक्षक अभ्यर्थी।
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शिक्षक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बीच भाजपा MLC जीवन कुमार उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैं एमएलसी नहीं आपका भाई के तौर पर यहां आया हूं। हमलोग हर कदम पर आपके साथ खड़ें हैं। नीतीश सरकार धूप में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग जरूर सुननी चाहिए। सरकार जल्द से जल्द उनकी मांग पूरी करें। एक महिला शिक्षक अभ्यर्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री द्वारा कई बार कहा गया कि हमलोगों ने शिक्षकों के लिए यह किया और वह किया। आपको पहले बताना था कि आप एग्जाम लेंगे फिर बहाली करेंगे। CTET-BTET पास अभ्यर्थी बहाली के इंतजार में थी। और नियजित शिक्षक वेतनमान के आस में थे लेकिन नई शिक्षक नियमावली के जरिए सरकार ने लाखों अभ्यर्थी और नियोजित शिक्षकों को धोखा देने का काम किया है। सरकार से अपील है वह हमारी मांगों को पूरी करे नहीं तो चुनाव में भी बहिष्कार होगा।