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Bihar Land Survey: नीतीश सरकार ने भूमि सर्वे में बढ़ाई सहूलियतें; भूमि सुधार मंत्री बोले- आसान हुआ जमीन का काम

Tue, 10 Dec 2024 06:55 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News: अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि रैयत का रैयती खेसरा पर दखल-कब्जा है लेकिन रैयत के पास भूमि पर स्वामित्व से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। ऐसी स्थिति में सिर्फ उसी रसीद के आधार पर ही खतियान बन जाएगा। 
 
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मंत्री दिलीप जायसवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार में भू अभिलेखों की स्थिति ठीक नहीं है। कैडस्ट्रन सर्वे को 100 साल और रिविजनल सर्वे को हुए 50 साल से ज्यादा बीत चुके हैं। बाढ़, अगलगी, दीमक लगने से बड़ी संख्या में जमीन के कागजात नष्ट हो गए हैं। ऐसी स्थिति में लोगों में भय था कि कागजात के अभाव में कहीं उनकी जमीन उनके हाथ से निकल नहीं जाए। हमने उनके भय को दूर करने का काम किया है। उम्मीद है कि अब लोग भूमि सर्वे के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और अब भूमि सर्वे की रफ्तार भी तेज होगी। मंत्री ने कहा कि  बिहार में जमीन विवाद से संबंधित समस्याओं को दूर करने की दिशा में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लगातार सक्रिय है। इस क्रम में किसानों की समस्याओं की पहचान कर उसके समाधान की कोशिश लगातार विभाग की ओर से चल रही है।

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अब रसीद के आधार पर बनेगा खतियान
विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम के अंतर्गत रैयतों के अधिकार अभिलेख यानि खतियान निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत खेसरों की अधिकारिता निर्धारण की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी निर्देश बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त नियमावली, 2012 के लागू होने की तिथि से ही मान्य होंगे।  उन्होंने कहा कि रैयत का रैयती खेसरा पर दखल-कब्जा है लेकिन रैयत के पास भूमि पर स्वामित्व से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है या कागजात के नाम पर सिर्फ लगान रसीद है ऐसी स्थिति में सिर्फ उसी रसीद के आधार पर ही खतियान बन जाएगा। 
 
स्वत्वाधिकारी का नाम भी अहम साक्ष्य
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि अगर रैयत का किसी भू-खंड पर शांतिपूर्वक दखल-कब्जा है तो खेसरा के चौहद्दीदारों का बयान भी महत्वपूर्ण साक्ष्य होगा साथ ही उस खेसरा के चौहद्दी में जमीन बिक्री, विनिमय या निबंधित बंटवारा में स्वत्वाधिकारी का नाम भी अहम साक्ष्य माना जाएगा और वह भी स्वामित्व निर्धारण का आधार होगा। अगर किसी भूमि पर रैयत का सिर्फ दखल-कब्जा है, दस्तावेज के साथ न तो जमाबंदी कायम है ना ही लगान रसीद कट रही है तो खाता बिहार सरकार के नाम से खोला जाएगा लेकिन अवैध दखलकार का नाम अभ्युक्ति कॉलम में दर्ज किया जाएगा। आपसी सहमति पर आधारित सभी पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित बंटवारा के आधार पर सभी हिस्सेदारों का खाता अलग-अलग खुलेगा, अगर असहमति है तो संयुक्त खाता खुलेगा। 
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दाखिल खारिज कराना अनिवार्य नहीं
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि किसी व्यक्ति ने निबंधित जमीन खरीदा है लेकिन दाखिल-खारिज नहीं कराया है तो दाखिल खारिज कराना अनिवार्य नहीं है। सर्वे कर्मी भी शांति पूर्ण दखल कब्जा एवं केवाला की सत्यता के बारे में संतुष्ट होने पर क्रेता के नाम से खाता खोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्वामित्व के सोलह सवालों पर एक अधिसूचना के जरिए सारी स्थिति को स्पष्ट किया गया है। अब कोई अस्पष्टता या विवाद होने की स्थिति में सर्वे कर्मियों को निर्णय लेने में सुविधा होगी। बंदोबस्त कार्यालयों द्वारा सर्वे निदेशालय से अक्सर इन सवालों को स्पष्ट करने का आग्रह किया जा रहा था। अगस्त, 24 में बिहार के सभी अंचलों में भूमि सर्वे का काम शुरू हो चुका है। फिलहाल टेरीज लिखने एवं स्वघोषणा जमा करने का काम चल रहा है। ऐसी स्थिति में इस अधिसूचना के आने से आम रैयतों को काफी सुविधा होगी एवं भ्रम एवं संशय की स्थिति समाप्त हो जाएगी।

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