सहायक लोको पायलट ऋतिका।
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शुरू में लगता था डर
ऋतिका ने रेलवे में अपनी नौकरी के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्होंने सहायक लोकोपायलट के रूप में नौकरी शुरू की थी, तब थोड़ा डर लगता था कि ट्रेन चला पाऊंगी या नहीं, लेकिन धीरे-धीरे यह डर समाप्त होता गया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें ट्रेन चलाने में बहुत अच्छा लगता है। ऋतिका यात्री ट्रेन और मालगाड़ी दोनों ही चलाती हैं, उन्होंने कहा कि ट्रेन चलाने के दौरान अलग-अलग शहरों में जाना काफी रोमांचक लगता है और उन्हें अपने कार्य के दौरान काफी खुशी महसूस होती है।
रेलवे से मिल रही विशेष सुविधा
रेलवे में सहायक लोको पायलट के रूप में ऋतिका अपनी जिम्मेदारियों से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन चलाने से दो घंटे पहले कॉल बुक दिया जाता है और ड्यूटी पूरी होने के बाद 16 घंटे का आराम दिया जाता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ रेलवे में लोको पायलट की मिलने वाली सुविधाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। रेलवे ने महिला लोको पायलट के लिए अलग से रनिंग रूम की व्यवस्था की जाती है और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलता है।