तेज प्रताप यादव इस बार अपनी विधानसभा सीट बदल सकते हैं।
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बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में अरसे से जिस हंगामे की आशंका दिख रही थी, वह इस तरह होगा- यह उम्मीद किसी को नहीं थी। सोशल मीडिया स्टार बने तेज प्रताप यादव की इसी प्लेटफॉर्म के नाम पर बलि पड़ गई। लालू प्रसाद यादव ने पार्टी के साथ परिवार से भी बाहर कर दिया। तलाक का केस चलते हुए अपनी ही जाति की कथित प्रेमिका के साथ तस्वीर सामने आने पर तेज प्रताप यादव की यह विदाई ऐसी है कि बिहार का राजनीतिक तापमान गरमा गया है। सत्ताधारी दल इसमें तेजस्वी यादव का हाथ बता रहे। खैर, इसके साथ शुरू हो गई है दो विधानसभा सीटों की चर्चा। एक उस सीट की, जहां से नहीं चाहते हुए भी तेज प्रताप पिछली बार उतरे और जीते थे। दूसरी उस सीट की, जहां वह लड़ना चाहते थे और शायद इस बार लड़ें भी।
हसनपुर विधानसभा सीट से हारते तो खत्म होता कॅरियर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी शुरू होने से पहले राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से बाहर कर दिया। वैसे, देखा जाए तो 2020 के बिहार चुनाव के समय ही तेज प्रताप का कॅरियर खत्म होने वाला था। तेज प्रताप समस्तीपुर जिले की हसनपुर सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे, हालांकि उन्हें यही सीट मिली। उन्हें उनकी पसंदीदा सीट महुआ से राजद ने चुनाव में नहीं उतारा। जनता दल यूनाईटेड को उस चुनाव में काटने के लिए चिराग पासवान नहीं उतरे होते तो सीन कुछ अलग होता। कहने को उस समय पप्पू यादव की तत्कालीन पार्टी- जन अधिकार पार्टी ने भी तेज प्रताप को हराने का कम प्रयास नहीं किया था, लेकिन किसी की बात नहीं बनी थी।
हसनपुर में जदयू को हराने उतरा था लोजपा, वरना...
तेज प्रताप यादव ने 140 हसनपुर विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर जीत दर्ज की थी। तब तेज प्रताप को 80991 वोट मिले थे। जनता दल यूनाईटेड के राज कुमार राय को 59852 मतों से संतोष करना पड़ा था। जदयू के प्रत्याशियों को हराने के लिए लोक जनशक्ति पार्टी ने मनीष कुमार को उतारा था, जिन्होंने 8797 वोट हासिल किया था। दूसरी तरफ तेज प्रताप का वोट काटने के लिए पिछले साल कांग्रेस में जाकर भी निर्दलीय संसदीय चुनाव लड़कर जीतने वाले राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी कसर नहीं छोड़ी थी। पप्पू यादव की तत्कालीन पार्टी को हसनपुर सीट पर 9882 वोट मिले थे।
पसंदीदा सीट से लड़ने के एलान पर भी मची थी रार
2020 के बिहार चुनाव में तेज प्रताप यादव भले मान गए थे। हारे नहीं तो हंगामा भी ज्यादा नहीं मचा था। लेकिन, इस बार उन्होंने पहले ही महुआ में घूमकर अपने पक्ष में नारेबाजी करवा ली थी। एलान कर दिया था कि उन्होंने यहां से बहुत काम किया है, इस बार यहीं से लड़ेंगे। उनके इस एलान से भी राजद और लालू परिवार के अंदर अनबन थी। हसनपुर समस्तीपुर जिले में है, जबकि महुआ वैशाली जिले में है। वैशाली के राघोपुर से तेजस्वी यादव विधायक हैं। जहां तक महुआ सीट का सवाल है तो यहां से राजद के मौजूदा विधायक मुकेश कुमार रौशन हैं, जिन्हें 2020 के चुनाव में 62747 वोट मिले थे। तब जदयू की आशमा परवीन को 48977 वोट हासिल हुए थे, क्योंकि यहां राजग का बड़ा वोट (25198) लोक जनशक्ति पार्टी ने काट लिया था। अब इस बार, राजद से निकाले जा चुके तेज प्रताप अगर यहीं से चुनाव में उतरते हैं तो मुकाबला रोचक होगा। मौजूदा राजद विधायक को तेज प्रताप के निष्कासन से राहत मिली होगी, लेकिन उनका चुनाव में उतरना कहीं न कहीं परेशान जरूर करेगा।