कर्पूरी ठाकुर अपने जमाने में मिसाल बनकर उभरे थे, तभी उन्हें जननायक कहा गया। स्वीकार किया गया। 1988 में उनके निधन के बाद पिछड़ी जातियों से कई नेता उभरे, लेकिन उन जैसा कोई नहीं था और न अब भी वैसा मुकाम किसी को हासिल है। जाहिर है, पिछड़ों की राजनीति करने वाले सभी दल उन्हें अपना बताने में कभी पीछे नहीं हुए। यही कारण है कि उनकी जन्मशती पर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड करीब एक महीना पहले ही बड़ा कार्यक्रम कर क्रेडिट लेना चाहता था। लेकिन, जदयू की अंदरूनी खटपट के बीच ठंड के नाम पर दिसंबर में वह कार्यक्रम रद्द हो गया। 24 जनवरी को उनकी 100वीं जयंती पर अब भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के साथ जदयू का भी बड़ा कार्यक्रम है। लेकिन, ठीक एक दिन पहले उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा कर भाजपा ने एक तरह से बाजी मार ली। खबर मिलते ही कल के कार्यक्रम का पोस्टर बदलने की तैयारी हो गई है।