परिजन न्याय की गुहार लगाने पहुंचे न्यायालय की शरण में
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मुजफ्फरपुर पुलिस ने भी नहीं किया मामला दर्ज, जीरो एफआईआर पर दी अजब दलील
थक-हारकर परिजन वापस अपने घर मुजफ्फरपुर लौट गये। अब परिजन जीरो एफआईआर के तहत मामला दर्ज कराने के लिए मुजफ्फरपुर के थाना में पहुंचे, लेकिन पुलिस तो पुलिस ही है, चाहे आन्ध्र प्रदेश की हो या बिहार की। परिजन जीरो एफआईआर दर्ज कराने के लिए मुजफ्फरपुर के पानापुर करियात थाना में गये लेकिन वहाँ पर भी जीरो एफआईआर दर्ज नहीं किया गया। पुलिस ने यह दलील देते हुए परिजनों को थाना से लौटा दिया कि घटना आन्ध्र प्रदेश की है तो प्राथमिकी वहीँ दर्ज होगी। कानून के परिवर्तन करने से पुलिस की व्यवहारिकता में परिवर्तन नहीं होता, बस कागजी कानून ही बदलते हैं। काफी गुहार लगाने के बाद भी मुजफ्फरपुर के पानापुर करियात थाना की पुलिस ने जीरो एफआईआर नहीं किया। अंत में थक-हारकर परिजन ने अधिवक्ता एस.के.झा के माध्यम से रमेश अन्ना और राजू कैप्टन के विरुद्ध मुजफ्फरपुर कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है, जिसकी सुनवाई 12 सितम्बर 2024 को होगी।
जानिए क्या है जीरो एफआईआर
जीरो एफआईआर एक प्रक्रियात्मक उपकरण है जो नागरिकों को अपराध की रिपोर्ट करने का अधिकार देता है, चाहे व्यक्ति कहीं भी रहता हो या अपराध कहीं भी हुआ हो। इसे 2013 में न्यायमूर्ति वर्मा समिति की सिफारिश पर पेश किया गया था। इसका उद्देश्य पीड़ितों की तुरंत सहायता करना और अपराधों की रिपोर्ट करने में अनावश्यक देरी से बचना है।
अब मामला पहुंचा न्यायलय में
इस पूरे मामले पर मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत होता है। सही तरीके से अगर पुलिस इस पूरे ही मामले में अनुसंधान करे तो मामले का पर्दाफाश हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पानापुर करियात की पुलिस के द्वारा जीरो एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना काफी दुःखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मुझे न्यायालय पर पूरा विश्वास है और पीड़ित परिवार को न्याय अवश्य मिलेगा।