Bihar News : बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार गरिमा मलिक को भागलपुर में पोस्टिंग मिली है। सहायक समाहर्ता-सह-सहायक दंडाधिकारी के रूप में गरिमा की यह पहली पोस्टिंग है। वह आईएएस टॉपर्स में दूसरे नंबर पर थीं।
सहायक समाहर्ता-सह-सहायक दंडाधिकारी के रूप में गरिमा की यह पहली पोस्टिंग है। बक्सर जिला की रहने वाली आईएस गरिमा लोहिया की पहली पोस्टिंग भागलपुर में हुई है, जिन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक-2 स्थान प्राप्त किया था। गरिमा लोहिया ने बताया कि वह बक्सर के वूड स्टॉक स्कूल से पढ़ाई की है। उनके पिता नारायण प्रसाद लोहिया का निधन 2015 में हो चुका है। पिता के जाने के बाद उनकी हिम्मत टूट चुकी थी। लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और काफी मेहनत कर यह सफलता पाई। गरिमा ने बताया कि उन्होंने बक्सर में रह कर ही तैयारी की। कोरोना के दौरान कोचिंग नहीं कर सकती थी। इसलिए ऑनलाइन कोर्सेस से ही तैयारी की।
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सेल्फ स्टडी पर दिया था ज्यादा जोर ऑनालइन की भी ली थी मदद
गरिमा ने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉमर्स में स्नातक किया। फिर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। कठिन मेहनत के बाद उन्हें सफलता मिली। उनके परिवार में मां, भाई और एक बड़ी बहन है। पढाई को लेकर उन्होंने बताया कि 'मैंने सेल्फ स्टडी पर ही ज्यादा जोर दिया। सामान्य ज्ञान के लिए सोशल साइट्स की मदद ली। इस परीक्षा में तैयारी बहुत मुश्किल होती है। इसका मतलब यह नहीं होता कि हम निराश हो जाएं। आपको जो चीज खुशी देती हो, वह करें, परिवार के साथ रहें और मनोबल बढ़ाते रहें। मैं अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां को देना चाहती हूं।'
कोविड की आपदा को अवसर में बदलकर बनी आईएएस
गरिमा लोहिया ने अमर उजाला को बताया कि 2020 में जब कोविड की आपदा आई तो उस समय घर में बंद रहना मजबूरी थी, लेकिन हमने आपदा को अवसर में बदल दिया। उन्होंने कहा कि हमने यह भ्रांति भी तोड़ी है कि बिना महंगे कोचिंग संस्थानों में पढ़े हुए यूपीएससी की यह परीक्षा नहीं पास की जा सकती।