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Chhath Puja : शाम ढल गई, अब बिहार हो जाएगा शांत; खरना पूजा का समय और इसकी सबसे जरूरी बात जानें अभी

Sat, 18 Nov 2023 06:51 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Kharna : लोक आस्था के महापर्व छठ का आज दूसरा दिन है। अब शाम के साथ खरना पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। इसमें 'शांति' की जरूरत पड़ती है। शाम करीब 7 बजे से साढ़े 8 बजे तक अपेक्षाकृत शांति रहेगी। कहा जाता है कि अशांति फैलाने वालों को पाप लगता है। क्यों?
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खरना का दिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शनिवार 18 नवंबर को शाम करीब सात बजे से रात करीब साढ़े आठ बजे तक अपेक्षाकृत ज्यादा शांति रहेगी। जहां भी छठ होता है, वहां जरूर। वजह है खरना पूजा और इसमें 'शांति' की जरूरत। खरना पूजा के लिए समय कोई पंडित नहीं बताते। सूर्यास्त होने के बाद तैयारी शुरू हो चुकी है। व्रती के नहाने और बाकी तैयारियों के हिसाब से शाम सात बजे से साढ़े आठ बजे के बीच ज्यादातर घरों में खरना पूजा होगी।

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आवाज से भंग होता है ध्यान, और इससे...
खरना पूजा जिन घरों में होता है, उसमें भी बहुत सारे लोग यह नहीं जानते कि इस पूजा में 'शांति' कितनी जरूरी शर्त है। आज सूर्यदेव की बहन छठी मइया की पूजा होती है। ज्योतिषविद् और कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित अरुण कुमार मिश्रा बताते हैं कि छठी मइया देवी भगवती के नौ रूपों में एक देवी कात्यायनी हैं। खरना में छठी मइया के रूप में इनकी ही पूजा होती है। गरीब हो या अमीर, हर व्रती लगभग एक ही तरीके से और संसाधन के साथ यह पूजा करता है। व्रती स्त्री हों या पुरुष, दोनों पर एक ही विधान लागू होता है। नए कपड़े में व्रती पूजा करने के लिए जब कमरा बंद करें तो इतनी शांति होनी चाहिए कि उनके कान में कोई आवाज नहीं जाए। पूजा करने के साथ ही व्रती आज पहली और एकमात्र बार भोजन-जल ग्रहण करते हैं। व्रती की कान तक अगर कोई आवाज पहुंच गई तो ध्यान भंग हो जाता है और खाना-पानी बंद कर गेट खोल दिया जाता है। अगर आवाज नहीं आए तो व्रती क्षमतानुसार भोजन-पानी ग्रहण कर स्वयं दरवाजा खोलते हैं और इसके बाद घर के बाकी सदस्य छठी मइया के साथ व्रती का आशीर्वाद लेते हैं।

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खरना में शामिल महिला और पुरुष व्रती - फोटो : अमर उजाला
इस अन्न-जल के बाद अब निर्जला पूजा
व्रतियों ने शनिवार को पूरे दिन निर्जला उपवास कर खरना पूजा की तैयारी की। अब कुछ देर में मीठी खीर और घी वाली पूड़ी या रोटी खाने के साथ पूजाघर में ही जो पानी पिएंगे, उसके बाद फिर निर्जला उपवास रविवार को पूरे दिन-रात रहेगा और सोमवार को सुबह वाले अर्घ्य तक यही स्थिति रहेगी। इसलिए, खरना पूजा के समय अशांति फैलाकर व्रती के अन्न-जल ग्रहण करने में व्यवधान उत्पन्न करने वालों को पाप का भागी कहा जाता है। लोग विपरीत परिस्थिति में भी आवाज नहीं निकालते हैं, ताकि उनके हिस्से कोई गलती नहीं आ जाए। यही कारण है कि बिहार के शहरों में भी गाड़ियों का परिचालन खरना की शाम कम हो जाता है।
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