बहन प्रेमी के साथ भागी तो उसे मृत समझकर दाह संस्कार कर दिया।
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जिसके नाम की हल्दी लगाई, मेहंदी सजाई- उसके साथ अग्नि के सात फेरे लगाने से पहले लड़की ने घर वालों को फेरे में फंसा दिया। हल्दी-मेहंदी के बाद दुल्हन के किसी और युवक के साथ भागने से समाज के ताने से तंग उसके भाई ने अपनी बहन की अर्थी निकाली। परिवार के लिए उसे मरा हुआ घोषित कर कुश की लाश बनाकर उसे चिता तक पहुंचाया। इसके साथ ही विधि-विधान से उसके श्राद्ध की तैयारी भी कर ली। मामला बिहार के पूर्णिया जिले से है।
गांव के लड़के के साथ घर से भागी थी लड़की
कहानी की शुरुआत 10 जून की रात से होती है। टीकापट्टी बाजार के बिहारी गुप्ता की बहन परिवार वालों को बिना बताए अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। 11 जून को बिहारी गुप्ता टीकापट्टी थाना पहुंचा और अपनी बहन के अपहरण का केस दर्ज करवाया। उसने गांव के ही सुधांशु कुमार पर अपहरण का आरोप लगाया। बिहारी गुप्ता ने बताया कि उसकी बहन की शादी 12 जून को होने वाली है। गांव का ही सुधांशु कुमार ने उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद पुलिस छानबीन में जुट गई। इधर, लड़की ने अपने प्रेमी के साथ मंदिर में शादी कर ली।
भाई ने जिंदा बहन की अर्थी सजा दी।
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लड़की ने कहा- अपनी मर्जी से मंदिर में शादी की
बीते रविवार लड़की थाना पहुंची। उसने पुलिस से कहा कि उसने अपनी मर्जी से सुधांशु के साथ जाकर शादी कर है। घरवाले किसी और से शादी करवाना चाहते थे, इसलिए उसे ऐसा कदम उठाना पड़ा। अपहरण की बात झूठी है। इस मामले में सुधांशु कुमार की कोई गलती नहीं है। इसके बाद पुलिस ने बिहार गुप्ता को मामले की जानकारी दी और कहा कि उसकी बहन सकुशल है।
भाई ने कहा- कभी पिता की कमी खलने नहीं दी
लड़की की शादी रचा लेने की जानकारी बिहारी गुप्ता को मिली तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया। सोमवार को उसने अपने परिजनों के साथ मिलकर जिंदा बहन का श्राद्धकर्म करने की ठान ली। आसपास के लोगों ने उसे ऐसा करने से मना किया लेकिन बिहारी ने किसी की एक न सुनी। बिहारी ने कहा कि पिता की मृत्यु के बाद अपनी दोनों बहन को कभी पिता की कमी खलने नहीं दी। जितना हो सकता था उससे बढ़कर बहनों की परवरिश की। एक बहन की शादी हो गई थी। दूसरी की शादी उसकी ही मर्जी से तय किया। लेकिन, हल्दी की रस्म पूरी कर फरार हो गई। इस कारण मैं लड़के वालों को मुंह दिखाने लायक तक नहीं रहा। उसने अपने साथ-साथ मेरी इज्जत की परवाह भी नहीं की। इसलिए उसके रिश्ते का दाह संस्कार आज कर दिया।अब मैं एक भाई और एक बहन हूं।
कुश की प्रतिमा से भाई ने बनाई बहन की अर्थी।
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कुश की प्रतिमा बनाकर चिता पर जलाई
बिहारी गुप्ता ने परिजनों के साथ मिलकर कुश की प्रतिमा तैयार किया। इसके बाद पूरे रीति-रिवाज के साथ उसकी अर्थी सजाई। अर्थी में अपनी बहन का फोटो भी लगा रखा था। इसके बाद कुश की अर्थी लेकर श्मशान घाट के लिए निकला। बिहारी के मुंह से निकल रहा था राम-नाम सत्य है। उनके साथ चल रहे लोग पीछे से कह रहे थे, जो ऐसा करेगा उसका यही गत होगा। यह नारा लगाते हुए अर्थी लेकर परिजन टीकापट्टी श्मशान घाट पहुंचे और विधिवत अंतिम संस्कार कर दिया।