2016 में आरक्षण को लेकर कोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद अटकी राज्यकर्मियों की प्रोन्नति का रास्ता बिहार सरकार ने 13 अक्टूबर को खोला और अब पहला 'रुझान' सामान्य प्रशासन विभाग से सामने आया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने तीन दिन के अंदर पहली दो सूचियां जारी की हैं। स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा के आधार पर पहली सूची में सात और दूसरी सूची में दो राज्यकर्मियों को प्रोन्नति दी गई।
17 प्रतिशत आरक्षित सीट को फ्रीज कर फिर आरक्षण लागू किया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछली कैबिनेट बैठक के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस के मद्देनजर 16 प्रतिशत एससी और एक प्रतिशत एसटी की सीटों को फ्रीज करते हुए शेष 83 प्रतिशत प्रोन्नति की खाली सीटों के लिए प्रोमोशन का प्रावधान लागू किया। इस 83 प्रतिशत में 16 प्रतिशत एससी और एक प्रतिशत एसटी को आरक्षण देते हुए प्रोन्नति सूची फाइनल करने का आदेश दिया गया। चूंकि दो महीने के लिए प्रावधानों में यह फेरबदल किया गया है, इसलिए सरकार ने रविवार को भी इस प्रक्रिया को बाधित नहीं करने का आदेश जारी किया। परिणाम यह रहा कि सोमवार को पहली दो सूची जारी हो गई।
जानिए किनको दी गई प्रोन्नति
सबसे पहले बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा के सात निम्नवर्गीय लिपिक को पुनरीक्षित वेतन स्तर चार का कार्यकारी प्रभार देते हुए उच्चवर्गीय लिपिक के रूप में प्रोन्नति दी गई है। आयुक्त कार्यालय सहरसा में पदस्थापित उदय कुमार झा, सामान्य प्रशासन विभाग में कार्यरत संजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रूही कुमारी व संजना प्रिया, आयुक्त कार्यालय पटना में कार्यरत रवि भूषण प्रसाद और राज्य निर्वाचन प्राधिकार में कार्यरत रूपेश कुमार को पे बैंड 5200-20200 और ग्रेड पे 2400 के तहत यह प्रोन्नति दी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी की दूसरी सूची
सामान्य प्रशासन विभाग ने ही दूसरी सूची जारी की जिसमें दो कार्यालय परिचारियों को निम्न वर्गीय लिपिक के रूप में प्रोन्नति दी गई। तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में कार्यरत कार्यालय परिचारी मोहम्मद अंजारुल और सामान्य प्रशासन विभाग में कार्यालय परिचारी प्रेम कुमार को निम्न वर्गीय लिपिक में प्रोन्नति देते हुए वर्तमान पदस्थापना की जगह पर ही रखा गया है।